तीन माह बाद भी 5000 एकड़ से नहीं निकला पानी, नहीं हो पाएगी गेहूं की बुआई
अमर उजाला ब्यूरो
जुलाना। जुलाना के विभिन्न गांवों में लगभग पांच हजार एकड़ भूमि से बरसात का पानी तीन माह बाद भी नहीं निकल पाया है। अब भी खेतों में एक से दो फीट पानी भरा हुआ है। इससे आने वाली गेहूं की फसल की बिजाई भी नहीं हो पाएगी। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं। किसानों की मांग है कि उन्हें एक के बजाए दोनों फसलों का मुआवजा दिया जाए।
जुलाना क्षेत्र में दो महीने पहले हुई बरसात के कारण दर्जनों गांवों में फसल जलमग्न हो गई थी। गांव शामलो कलां में 500 एकड़, गतौली में 1000, जैजैवंती में 500 एकड़, मेहरड़ा में 400 एकड़, करेला में 700 एकड़, बूढ़ाखेड़ा में 300 एकड़, हथवाला में 200 एकड़, पौली में 500 एकड़, गढ़वाली खेड़ा में 400 एकड़ खेतों में पानी भरा है। पानी की निकासी भी ट्रैक्टरों और पंपों द्वारा की जा रही है, लेकिन पानी अधिक होने के कारण खेतों में अब भी एक से दो फीट पानी भरा हुआ है। पानी नहीं निकलने से किसानों ने प्रशासन से दोनों फसलों के मुआवजे की मांग की है। कई किसानों ने तो अपने लेवल पर पानी निकालने की कोशिश की लेकिन पानी अधिक होने के कारण पूरा पानी नहीं निकल पाया। प्रशासन के पानी निकालने के सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इसे लेकर किसानों में रोष बना हुआ है।
जलमग्न खेतों की जल्द हो गिरदावरी
जुलाना क्षेत्र में तीन माह बाद भी पानी भरा है। प्रशासन पानी निकालने में असमर्थ साबित हुआ है। प्रशासन को किसानों के जलमग्न खेतों की गिरदावरी करवाकर मुआवजा देना चाहिए।
ओमप्रकाश लाठर।
जलभराव का हो स्थायी समाधान
हर वर्ष क्षेत्र में जलभराव से किसानों की पकी-पकाई फसल खराब हो जाती है। प्रशासन को किसानों की सुध लेते हुए क्षेत्र में और ड्रेनों का निर्माण करें और पुरानी ड्रेनों की क्षमता बढ़ाई जाए ताकि किसानों की फसल को बचाया जा सके।
कुलबीर किसान।
क्या कहते हैं अधिकारी
फसलों की गिरदावरी करवाई गई है। गिरदावरी करवाकर ब्योरा उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। जिन किसानों की गेहूं की फसल की बिजाई नहीं होगी उन्हें एसडीएम ने आश्वासन दिया है कि गिरदावरी करवाकर मुआवजा दे दिया जाएगा। जल्द ही जिन खेतों में गेेहूं की फसल की बिजाई नहीं हो पाएगी उनका ब्योरा भी उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।
शिव कुमार सैनी, तहसीलदार जुलाना।