अमर उजाला ब्यूरो
जींद। रोहतक रोड स्थित एक ऑयल फैक्टरी के बॉयलर का ढक्कन फट गया। ढक्कर वहां काम कर रहे मैकेनिक को लग गया। इसमें मैकेनिक गंभीर रूप से घायल हो गया। फैक्टरी में काम कर रहे अन्य लोगों ने उसे नागरिक अस्पताल में पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मृतक के भाई रामकुमार की शिकायत पर फैक्टरी मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
गांव किनाना निवासी 45 वर्षीय रमेश रोहतक रोड स्थित राजहंस ऑयल फैक्टरी में मैकेनिक के पद पर कार्यरत था। वह पिछले 30 वर्षों से फैक्टरी में काम करता था। पहले इस फैक्टरी में वनस्पति ऑयल बनाया जाता था जो बाद में बनाना बंद कर दिया। पिछले काफी समय से फैक्टरी में पुराने टॉयरों को जलाकर उनका ऑयल निकाला जाता था। फैक्टरी के सभी औजार व कलपुर्जे पुराने हो चुके थे। रमेश इसकी शिकायत कई बार फैक्टरी मालिक से कर चुका था लेकिन मालिक ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया। रविवार दोपहर को रमेश फैक्टरी में काम कर रहा था। उसके आसपास दो-तीन अन्य मजदूर भी खड़े थे। अचानक फैक्टरी में चल रहे बॉलयर का ढक्कर फट गया और पास खड़े रमेश की छाती में जा लगा। इससे रमेश मौके पर ही बेहोश होकर गिर गया। पास खड़े अन्य मजदूरों ने रमेश को उठाया और नागरिक अस्पताल में पहुंचाया। यहां चिकित्सकों ने रमेश को मृत घोषित कर दिया। सूचना पाकर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया और फैक्टरी मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
भाई घर में भी करता था फैक्टरी की हालत का जिक्र
राजकुमार ने कहा कि उसका भाई रमेश 30 वर्ष से इसी फैक्टरी में काम करता था। वह कई बार घर पर भी फैक्टरी के औजारों की खस्ता हालत के बारे में जिक्र करता था। उसे हर समय किसी हादसे का डर सताता रहता था। राजकुमार ने बताया कि उसने बीच में एक-दो बार फैक्टरी में इसी कारण जाना भी बंद कर दिया था लेकिन मालिकों के बार-बार कहने पर वह फैक्टरी में चला जाता। फैक्टरी काफी पुरानी हो चुकी थी। इसके किसी भी सिस्टम को कभी बदला नहीं गया था। बॉयलर की हालत तो सबसे खराब थी। राजकुमार ने कहा कि उसके भाई रमेश ने फैक्टरी मालिक से भी कई बार इस बारे में शिकायत की लेकिन फैक्टरी मालिक ने इसको कभी गंभीरता से नहीं लिया।
मृतक रमेश के भाई राजकुमार की शिकायत पर फैक्टरी मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल फैक्टरी मालिक के नाम का पता नहीं चला है। जल्द ही आरोपी को काबू कर लिया जाएगा।
-मनदीप कुमार, सदर थाना प्रभारी, जींद।
फैक्टरी में नहीं कोई अग्निशमन यंत्र
राजहंस फैक्टरी में आग बुझाने के लिए कोई भी यंत्र उपलब्ध नहीं है। राजकुमार ने आरोप लगाया कि वे कई बार उसके भाई को लेने के लिए फैक्टरी में गया लेकिन वहां की स्थिति बहुत खराब थी। फैक्टरी में कोई भी आग बुझाने का यंत्र नहीं था जबकि फैक्टरी में टायरों को जलाया जाता था। दूसरे मजदूर भी इस बारे में कई बार आवाज उठा चुके थे।
हादसा हो सकता था बड़ा
रोहतक रोड पर जहां राजहंस ऑयल फैक्टरी है, वहां उसके सामने एचपी गैस का प्लांट भी है। यहां से ट्रकों में रसोई गैस भरी जाती है और यहां पर एचपी कंपनी की रसोई गैस का स्टॉक किया जाता है। फैक्टरी के आसपास गैस से भरे हुए ट्रक भी खड़े रहते हैं। अब तो बॉलयर का ढक्कन ही फटा है। यदि कभी बॉयलर फट जाता तो हादसा बहुत बड़ा हो सकता था।
फायर विभाग से एनओसी का नहीं पता
अग्निशमन विभाग के फायर अधिकारी ताराचंद सैनी ने कहा कि आज वे छुट्टी पर हैं। इस संबंध में फाइल देखकर ही बताया जा सकता है कि राजहंस ऑयल फैक्टरी के पास अग्निशमन विभाग से एनओसी है या नहीं।