फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रस्तावित एंकर

विज्ञापन
विज्ञापन
जींद। शहर की जानी मानी शिक्षण संस्था की प्रबंधक समिति द्वारा हिंदी शिक्षिका निर्मला रानी को अयोग्य ठहराते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग पर स्कूल शिक्षा निदेशक ने प्रबंधन समिति पर ही सवाल उठाए हैं। निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जिस समय निर्मला रानी को स्कूल में ज्वाइन करवाया गया, उस समय वर्तमान प्रधान लक्ष्मीनारायण बंसल भी प्रबंधक समिति में शामिल थे। ऐसे में निर्मला रानी की ज्वाइनिंग में वर्तमान प्रधान लक्ष्मीनारायण बंसल शामिल हैं।
विज्ञापन

गौरतलब है कि एसडीस स्कूल की प्रबंधक समिति ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भेज कर हिंदी शिक्षिका निर्मला रानी की योग्यता पर सवाल उठाए थे। साथ ही प्रबंधक समिति ने मांग की थी कि निर्मला रानी को सेवा मुक्त किया जाए, क्योंकि उनके द्वारा लगाई डिग्री जिस संस्थान से की गई है व संस्थान यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं है। इस पर शिक्षा विभाग ने जांच करवाई। इसके आदेश स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक राजीव रतन ने भेजी है। आदेशों में 16 बूंदों के अनुसार निर्मला रानी की ज्वाइनिंग को सही माना गया है। आदेशों में कहा गया है कि निर्माला रानी की ज्वाइनिंग विज्ञापित पद पर की गई है और इस पद के लिए जारी किए गए विज्ञापन में किसी प्रकार की योग्यता का जिक्र नहीं किया गया है। निदेश ने अपने आदेश में जांच अधिकारी सुरेंद्र पूनिया के हवाले से लिखा है कि उन्होंने प्रबंधक समिति के प्रधान से निर्मला रानी के प्रति सहानुभूति रखने की सिफारिश की है। गौरतलब है निर्माला रानी पिछले 16 साल से यहां शिक्षिका के पद पर कार्यरत है। इसमें कहा गया है कि बेशक निर्मला रानी द्वार पेश की गई डिग्री यूजीसी की सूची में नहीं है, लेकिन यह संस्थान यूजीसी की फर्जी संस्थानों की सूची में भी नहीं है। साथ ही आदेशों में कहा गया है कि जिस समय हिंदी शिक्षिका निर्मला रानी की ज्वाइनिंग हुई, उस समय वर्तमान प्रधान लक्ष्मीनारायण बंसल खुद प्रबंधक समिति के सचिव थे। इसी समिति ने निर्माला रानी का चयन भी किया है।
पक्षपातपूर्ण है फैसला
यह फैसला पक्षपात पूर्ण है। इसमें कई तथ्यों को सही नहीं रखा गया है। इसकी शिकायत शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से की गई है। निदेशक के आदेशों में कहा गया है कि जिस संस्थान की डिग्री निर्मला रानी ने दी है, वह न तो यूजीसी की सूची में है और न ही फर्जी संस्थानों की सूची में जब संस्थान सूची में ही नहीं है तो फर्जी सूची में कैसे हो सकता है। साथ ही इन आदेशों में कहा गया है कि उक्त संस्थान को मद्रास शैक्षिक नियम, सीबीएसीई, एजुकेशनल ट्रिब्यूलन : अहमदाबाद और ओड़िसा सरकार द्वारा मान्यता दी गई है, लेकिन इन आदेशों मे यह नहीं है कि क्या 1992 में यह डिग्री ओटी के समक्षक मान्य रही है या नहीं। ऐसे में जींद की जिला शिक्षा अधिकारी और स्कूल शिक्षा निदेशक ने इस मामले में अन्याय किया है। इसको लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव से पूरे मामले की जांच की मांग की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

लक्ष्मीनाराण बसंल, प्रधान एसडी स्कूल प्रबंधक समिति।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें