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इनेलो का इमोशनल ड्रामा : जनसभा में हुई भावुक, बोली मैं रो कर वोट नहीं मांग रही, लेकिन रूका नहीं जा रहा

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चार मिनट के भाषण में रोती रहीं नैना चौटाला
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। सोमवार शाम को शुरू हुआ इनेलो और जेजेपी का इमोशन खेल मंगलवार को भी दिनभर जारी रहा। दिग्विजय चौटाला की मां नैन चौटाला एक कार्यक्रम के दौरान भावुक हो गईं और करीब चार मिनट के भाषण में रोती रहीं। उन्होंने कहा यह मत सोचना कि वे रोकर वोट मांग रही हैं, लेकिन चार साल से वे खुद को रोक रही हैं, अब नहीं रुका जा रहा।
उन्होंने कहा कि यदि हरियाणा के लोग दुष्यंत चौटाला को चाहते हैं तो यह कोई दुष्यंत का गुनाह है क्या। उन्होंने कहा कि ऐसी क्या दुश्मनी है कि उनके बच्चों के लिए ऐसा बोला जा रहा है। नैना ने कहा कि राजनीतिक परिवार में आने के बावजूद उन्होंने कभी राजनीति को अच्छा नहीं समझा, लेकिन अजय चौटाला के जेल जाने के बाद उनको यह सब करना पड़ा। नैना चौटाला ने कहा कि वे बच्चों के लिए हर रोज माला जपती हैं। इससे उन्हें काफी मजबूती मिलती है, लेकिन आज पता नहीं वे क्यों भावुक हो गई हैं।
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जो दादा-दादी के नहीं हुए वो जींद के कैसे होंगे : सुरजेवाला
इनेलो परिवार में चल रहे घमासान में अब विरोधी दल भी कूद पड़े हैं। मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सुरजेवाला ने जेजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि जो दादा-दादी के नहीं हुए, वह जींद के कैसे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुनबाघाणी करने वाले जींद का भला नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि ‘मैं ओमप्रकाश चौटाला और उनके परिवार द्वारा जनता और क्षेत्र की अनदेखी के खिलाफ लड़ा, लेकिन जो आदमी एक इलेक्शन व एक जलसे के लिए 86 साल के बुजुर्ग को अस्पताल में इलाज करवाते समय तिहाड़ में भिजवा दें, वह जींद का क्या करेंगे। आप समझ सकते हैं। इनकी तरफ ध्यान नहीं देना है। मुझे मौका दीजिए आपके इलाके की तकदीर व तस्वीर बदलने का काम करेंगे।
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बुजुर्गों की बद्दुाएं लेकर आज तक कोई सफल नहीं हुआ : कुलदीप
केंद्रीय कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि सोशल मीडिया पर ओमप्रकाश चौटाला और उनकी पत्नी स्नेहलता के बयान से उन्हें बहुत ठेस पहुंची। जिस उम्र में पोतों को अपने दादा-दादी की सेवा करनी चाहिए, उस उम्र में अगर वे दादा-दादी अपने पोतों के मरने की दुआएं कर रहे हैं तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें कितना सताया होगा। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की बद्दुाएं लेकर आज तक कोई सफल नहीं हुआ। जो लोग अपने परिवार के नहीं हुए वे जनता के कैसे हो सकते हैं। राजनीति अपनी जगह है, मगर इस तरह से अपने ही परिवार के बुजुर्गों को इस हद तक अपमानित करने वालों को वोट डालने की गलती जींद की जनता नहीं कर सकती।
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