हरियाणा भूमि सुधार निगम ने जिंक के नाम पर बेच दी मिट्टी
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। एक ओर देश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाएं चल रही हैं तो दूसरी तरफ यह योजनाएं सरकारी सिस्टम की बदइंतजामी के चलते किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही हैं। ऐसा ही मामला हरियाणा भूमि सुधार निगम (एचएलडीआरसी) द्वारा किसानों को मुहैया करवाई गई जिंक में सामने आया है। जिंक की जांच करने पर पता चला कि जो पाउडर किसानों को बेचा गया है, उसमें जिंक की मात्रा शून्य प्रतिशत है। ऐसे में कोरी मिट्टी किसानों को अनुदान के नाम पर बेच दी गई। मार्केट में जहां बेहतर गुणवत्ता वाली जिंक प्रति दस किलोग्राम 300 रुपये में मिलती है, वहीं अनुदान के बावजूद एचएलआरडीसी से 380 रुपये प्रति दस किलोग्राम बेचा गया। हैरानी की बात यह है कि जो पाउडर किसानों को 21 प्रतिशत जिंक के लिए बेचा गया, इसमें शून्य प्रतिशत जिंक मिला। ऐसे में प्रदेशभर के किसानों को मुहैया करवाई गई जिंक पर अब सवाल उठ रहे हैं।
एक किसान की शिकायत के बाद पिछले साल दिसंबर में कृषि विभाग की टीम द्वारा जिंक सल्फेट के सैंपल लिए गए थे। जांच के बाद यह सैंपल फेल मिले थे। कृषि विभाग ने किसानों को जिंक देने पर रोक लगा दी थी। अब कृषि विभाग ने फर्म तथा उसके तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। फर्म ने घटिया क्वालिटी का जिंक सल्फेट बेचकर किसानों को तो चूना लगाया ही। साथ ही धरती की सेहत के साथ भी खिलवाड़ किया है।
दिसंबर में कृषि विभाग को शिकायत मिली थी कि जो धरती की सेहत सुधारने के लिए जिंक सल्फेट वितरित किया जा रहा है वह गुणवत्ताहीन और घटिया किस्म का है। इस पर 17 दिसंबर 2018 को कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोलर अधिकारी नरेंद्रपाल के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीम ने नई अनाजमंडी स्थित मैसर्ज हरियाणा भूमि सुधार निगम लिमिटेड से जिंक सल्फेट के सैंपल भरे, जिन्हें जांच के लिए लेबोरेट्री भेज दिया गया। जिंक सल्फेट की जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली आई। नियमानुसार जिंक सल्फेट की मात्रा 21 प्रतिशत होनी चाहिए थी। रिपोर्ट में जिंक सल्फेट की मात्रा शून्य पाई गई। जिस पर कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोलर ने जिंक सल्फेट सप्लाई करने वाली कंपनी व वितरकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की सिफारिश की। घटिया जिंक सल्फेट से किसानों को आर्थिक नुकसान तो हुआ ही साथ में धरती की सेहत से भी खिलवाड़ किया गया। शहर थाना पुलिस ने कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोलर नरेंद्रपाल की शिकायत पर सप्लायर चमन गार्डन रेलवे रोड करनाल निवासी अमर सिंह, मेसर्ज हरियाणा भूमि सुधार निगम नई अनाज मंडी जींद, श्यामपुरी कॉलोनी झोटावाड़ा राजस्थान निवासी हरविंद्र माथुर के खिलाफ आवश्यक वस्तु कालाबाजारी निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जिला में 134 किसानों ने लिया जिंक
दरअसल कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र, उर्वरक देने की स्कीम लाई जाती है। इसके तहत कृषि विभाग से किसान को परमिट लेकर एचएलआरडीसी से मान्यता प्राप्त दुकान से सामान लेना होता है। गेहूं के मौसम में जिले में 134 किसानों ने जिंक लिया था। इनके खेत को तो इस जिंक से लाभ नहीं हुआ, इन किसानों को मिट्टी बेच दी गई।
किसानों के साथ किया कंपनी ने धोखा
कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोलर नरेंद्रपाल ने बताया कि शिकायत मिलने पर जिंक सल्फेट के सैंपल भरे गए थे। रिपोर्ट में सैंपल फेल पाए गए हैं, जिस पर कंपनी समेत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की सिफारिश की गई। जिंक सल्फेट की मात्रा नियमानुसार 21 प्रतिशत होनी चाहिए थी, लेकिन रिपोर्ट में जिंक सल्फेट जीरो प्रतिशत पाया गया। जिन किसानों ने यह जिंक सल्फेट खरीदा, उनको आर्थिक नुकसान हुआ। इसके साथ-साथ धरती की सेहत सुधारने के लिए जिस जिंक की जरूरत थी, उससे कोई लाभ नहीं हुआ बल्कि धरती की सेहत के साथ खिलवाड़ हुआ।
जल्द किया जाएगा आरोपियों को गिरफ्तार
शहर थाना प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोलर द्वारा घटिया व गुणवत्ताहीन जिंक सल्फेट बेचने के बारे में शिकायत दी गई थी। इस पर दो लोगों को नामजद कर संबंधित कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।