स्वास्थ्य व्यवस्था पर अस्पताल में दस कमेटियां रखेंगी नजर
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर अन्य चीजों पर बारीकी से नजर रखने के लिए पहली बार जींद नागरिक अस्पताल में दस कमेटियों का गठन किया गया है। इसको लेकर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार कमेटियों का गठन किया है। इससे पहले अस्पताल में स्वास्थ्य के साथ अन्य व्यवस्था बिगड़ी हुई थी। हर कमेटी को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। अस्पताल प्रशासन का लक्ष्य अब क्वालिटी कंट्रोल में प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त करना है, जो नागरिक अस्पताल क्वालिटी कंट्रोल में प्रदेश में पहले स्थान पर रहता है, सरकार उसे तीन साल तक प्रतिवर्ष 23 लाख रुपये देती है। इसके लिए हर लिहाज से अस्पताल में हर सुविधा तथा चिकित्सा के उपलब्ध होना जरूरी है।
नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति किसी से छिपी हुई नहीं है। किसी न किसी मामले को लेकर नागरिक अस्पताल हमेशा सुर्खियों में रहा है। पिछले दो वर्ष से नागरिक अस्पताल प्रशासन तथा कर्मचारी नेताओं के बीच लंबी खींचतान चली। अब नागरिक अस्पताल से कई अधिकारियों व कर्मचारियों का ट्रांसफर होने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पटरी पर लौट आई है। चिकित्सकों का टोटा अब नागरिक अस्पताल से गायब हो चुका है। हर बीमारी से संबंधित विशेषज्ञ अब नागरिक अस्पताल में मौजूद रहेंगे। इससे मरीजों को जींद से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। नागरिक अस्पताल में पहली बार स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार दस कमेटियों का गठन किया गया है। यह कमेटियां अपना-अपना कार्य बारीकी से देखेंगी। इससे हर चीज पर नजर रखना आसान होगा। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने हर कमेटी का इंचार्ज एक चिकित्सक को बनाया है। उसे इसको बखूबी से निभाने की जिम्मेदारी दी गई है।
कमेटियां और उनके कार्य
सेक्सुअल हरासमेंट कमेटी : यह कमेटी किसी महिला कर्मचारी के उत्पीड़न से संबंधित शिकायत को देखेगी।
इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी : यह कमेटी अस्पताल में किसी मरीज को इंफेक्शन न हो उस पर ध्यान देगी। ऐसे मरीज को जल्द इंफेक्शन से उबारने का काम किया जाएगा।
हॉस्पिटल एथिक कमेटी : अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ अच्छा व्यवहार हो तथा जरूरतमंदों को जल्द सहायता मिले।
ग्रीवेंसिज कमेटी : किसी कर्मचारी की कोई परेशानी जैसे सैलरी, इंक्रीमेंट से संबंधित या किसी कर्मचारी के व्यवहार से संबंधित तो उसे दूर करने का काम करेगी।
मेडिकल ऑडिट कमेटी : मरीज को जरूरत के हिसाब से ही दवा दी गई हैं या नहीं। इसमें कुछ नियम बनाए गए हैं। उनके अनुसार ही दवाइयां दी जाएंगी। जैसे किसी मरीज में छह ग्राम रक्त है तो उसको दवाइयां दी जाएंगी। रक्त नहीं चढ़ाया जाएगा। पांच ग्राम से कम रक्त वाले व्यक्ति को ही रक्त चढ़ाया जाएगा।
ह्यूमन रिसोर्स कमेटी : कर्मचारियों की कमी होने के कारण बराबर काम का बंटवारा करना। कोई कर्मचारी खाली है तो उसको अन्य ज्यादा काम करने वाले क्लर्क आदि का काम बंटवाकर समय पर काम करवाना।
सीपीआर कमेटी : हर कर्मचारी को कम से कम इतनी ट्रेनिंग देना कि यदि मौके पर कोई चिकित्सक न हो तो वह मरीज की जान बचाने में सहायक हो सके। जैसे किसी व्यक्ति को तुरंत इलेक्ट्रिक शॉक की जरूरत है तो उसे बिना समय गंवाए इलेक्ट्रिक शॉक दिया जा सके, ताकि उसकी जान बचाई जा सके।
इंटरनल कम्यूनिकेशन कमेटी : हर कर्मचारी और अधिकारियों से तालमेल बनाकर रखना चाहिए। कम्यूनिकेशन गैप की वजह से कोई परेशानी न हो।
ड्रग थेरेपी कमेटी : दवाइयां कम हों तो पहले पुराने मरीज को ज्यादा महत्व देना, ताकि उसका इलाज बीच में न टूटे।
हॉस्पिटल सेफ्टी कमेटी : हर प्रकार को फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग देना, ताकि आग आदि लगने जैसे मौकों पर हर कर्मचारी मरीजों को बचाने में अहम भूमिका निभा सकें।
नागरिक अस्पताल में अब किसी चीज की कोई कमी नहीं है। दवाइयों की भी कोई कमी नहीं है। दस कमेटियां बनाकर चिकित्सकों को उनका जिम्मा सौंपा गया है। अब इनको मेंटेन रखना है। अस्पताल को इस बार क्वालिटी कंट्रोल में प्रदेश में प्रथम स्थान पर लाने की कोशिश होगी। सभी चिकित्सकों का पूरा सहयोग मिल रहा है। हर चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। धीरे-धीरे अस्पताल में हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
डॉ. गोपाल गोयल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, नागरिक अस्पताल, जींद