अजय के परिवार की सियासी तकदीर तय करेगी जींद की धरती
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पिछले दो महीने से इनेलो में चल रहा पारिवारिक और राजनीतिक विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। इसका फैसला शनिवार को जींद में होने वाली इनेलो की प्रदेश कार्यकारिणी व कार्यकर्ता सम्मेलन में होगा। इसी दिन जींद की धरती डॉ. अजय चौटाला के परिवार की राजनीतिक तकदीर भी तय करेगी। साथ ही अजय चौटाला खेमे का दावा भी है कि उसी दिन यह भी तय हो जाएगा कि असली इनेलो किधर है। वहीं युवा इनेलो के प्रदेश प्रभारी प्रदीप गिल के अजय खेमे में आने से जींद में राजनीतिक समीकरण अजय खेमे पक्ष में आता नजर आ रहा है।
जानकारी के लिए इनेलो के परिवार और राजनीति में जींद की धरती का अहम स्थान हैं। कुछ दिन पहले जींद आए इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने भी इस बात को स्वीकार किया था। इससे पहले जींद की धरती से ही राजनीतिक ऑक्सीजन लेकर चौधरी देवीलाल ने 1987 के चुनाव में 90 में से 85 सीट जीत कर इतिहास रच दिया था। उस समय चौधरी देवीलाल ने जींद में समस्त हरियाणा सम्मेलन कर न्याय युद्ध की शुरूआत की थी। ऐसे में एक बार फिर से देवीलाल परिवार जींद की धरती से ही अपने राजनीतिक भविष्य की लड़ाई का ऐलान करने जा रहा है।
भीड़ तय करेगी अजय का राजनीतिक भविष्य
शनिवार को जींद में डॉ. अजय चौटाला ने प्रदेश कार्यकारिणी की मीटिंग के साथ-साथ प्रदेश स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन भी रखा है। इसमें भीड़ जुटाने के लिए सांसद दुष्यंत चौटाला और उनकी पूरी टीम जी-जान से जुटी हुई है। ऐसे में कार्यकर्ताओं की भीड़ यह तय करेगी कि इनेलो के समर्थक किस पाले में हैं। इसी को आधार बनाकर अजय चौटाला और उनके बेटे इनेलो पर दावा ठोंकने की तैयारी कर रहे हैं।
कार्यकर्ता दुष्यंत के साथ नेताओं पर संशय
भले ही कार्यकर्ता अजय चौटाला व सांसद दुष्यंत के साथ हैं, लेकिन जींद के बड़े नेता अभी तक भी अपनी स्थिति साफ नहीं कर सके हैं। ऐसे में शनिवार के सम्मेलन में इन नेताओं की स्थिति भी साफ होगी कि वे किस ओर हैं। जींद में इनेलो के फिलहाल दो विधायक हैं, यह दोनों ही अभय चौटाला के मंच पर दिखे हैं, लेकिन विवाद के बाद सांसद दुष्यंत के कार्यक्रमों में इनकी शिरकत कम रही है। नए परिदृश्य में नरवाना के विधायक पिरथी नंबरदार दो दिन से भूमिगत हैं। हालांकि उनके निजी सहायक सुनील कुमार के अनुसार विधायक से बात हुई और वे जहां भी हैं अपनी मर्जी से हैं। इसके बावजूद जींद के राजनीतिक गलियारों में पिरथी नंबरदार को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं।