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शहर के सफाई के ठेके पर नगर परिषद में हंगामा

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अमर उजाला ब्यूरो
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जींद।
नगर परिषद द्वारा शहर की सफाई को लेकर की जा रही टेंडर प्रक्रिया हालांकि लंबे समय से सवालों के घेरे में है, लेकिन इसको लेकर सोमवार को नगर परिषद कार्यालय में हंगामा हो गया। इस दौरान शहर थाना प्रभारी जगबीर सिंह ने मध्यस्थता कर मामले को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान कार्यकारी अधिकारी कार्यालय में भी दोनों पक्षों के बीच तनातनी रही। सफाई टेंडर पर सवाल उठा रहे अनुसूचित जाति-ए महापंचायत के अध्यक्ष देवीदास वाल्मीकि ने तो ईओ को यहां तक कह दिया कि उन्होंने नगर परिषद घर की दुकान बणा रखी है। इस पर कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार चौहान ने कहा कि वे हाईकोर्ट में जा सकते हैं।
दरअसल शहर के सफाई के टेंडर पर पिछले छह महीने से विवाद चल रहा है। अब अनुसूचित जाति-ए महापंचायत का आरोप है कि नगर परिषद के अधिकारी जानबूझकर इस टेंडर से अनुसूचित जाति के लोगों को बाहर करना चाहते हैं। वहीं कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान का कहना है कि पूरी प्रक्रिया बेहद पारदर्शी तरीके से की गई है। सोमवार को धरने को लेकर अनुसूचित जाति-ए महापंचायत और नगर परिषद कर्मचारियों के बीच हंगामा हुआ। आरोप है कि नगर परिषद अधिकारियों द्वारा धरने के लिए लगाया टेंट व बिछाई गई दरियां जब्त कर ली गई हैं। हंगामे को देखते हुए शहर थाना प्रभारी जगबीर सिंह अपनी टीम के साथ नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। इसके बाद अनुसूचित जाति-ए महापंचायत के कार्यकर्ताओं ने बिना टेंट के ही धरना जारी रखा।
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ऐसे शुरू हुआ विवाद
पिछले साल अगस्त महीने में नगर परिषद द्वारा शहर की सफाई के लिए टेंडर जारी किए गए थे। तब नगर परिषद की चेयरमैन पूनम सैनी के पति और भाजपा के प्रदेश सचिव जवाहर सैनी का एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वे कमीशन की बात कर रहे हैं। हालांकि जांच में यह मामला निजी कारोबार का निकला, लेकिन डीसी अमित खत्री ने यह टेंडर रद्द कर दिया था। इसके बाद फरवरी माह में फिर से टेंडर की प्रक्रिया हुई और यह रद्द हो गया। तीसरी बार 15 मार्च को टेंडर खुलना था। इसमें एक ही सोसायटी ने टेंडर लगाया। कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान का कहना है कि यह सोसायटी नियमों का पूरा नहीं कर रही है, ऐसे में इसका टेंडर रद्द कर दिया गया है। वहीं अनुसूचित जाति-ए महापंचायत का कहना है कि अधिकारी जानबूझकर अनुसूचित जाति के लोगों को टेंडर से बाहर कर रहे हैं।

ईओ और पूर्व प्रधान के बीच बहस
जिस समय यहां हंगाम चल रहा था, नगर परिषद के पूर्व प्रधान विनोद आसरी भी मौके पर पहुंच गए। जब शहर थाना प्रभारी जगबीर सिंह की मौजूदगी में मीटिंग शुरू हुई तो विनोद आसरी ने भी नगर परिषद के अधिकारियों पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। ऐसे में ईओ ने विनोद आसरी को कहा कि इस विवाद में आप कौन होते हैं यह जानने वाले। इस पर आसरी ने कहा कि आप कौन। ईओ ने जवाब दिया कि मैं अधिकारी हूं। विनोद आसरी ने कहा कि मैं जनता का प्रतिनिधि हूं। आपसे बड़ा अधिकारी हूं। गौरतलब है कि वार्ड नंबर 15 से पार्षद हैं। करीब चार महीने पहले ही उन्हें उप प्रधान के पद से हटाया गया है।

सब कुछ नियमानुसार
सारी प्रक्रिया नियमानुसार की गई है। पहले नगर परिषद ने टेंडर मांगे गए थे। इसमें डीसी अमित खत्री ने कुछ शर्तें जुड़वा दी। इससे टेंडर रद्द किया गया। इसके बाद दोबारा टेंडर मांगे गए। इसमें एक ही सोसायटी ने टेंडर डाला है। यह सोसायटी शर्तें पूरी नहीं कर रही। ऐसे में अब जो टेंडर जारी होगा, जो आरक्षित श्रेणी के साथ-साथ सामान्य श्रेणी के लोगों के लिए भी होगा। यह प्रक्रिया नियमानुसार की गई है।
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डॉ. एसके चौहान।

अदालत में देंगे चुनौती
सफाई के टेंडर में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा हो रहा है। अधिकारी सुन नहीं रहे हैं। ऐसे में अब अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा से प्रक्रिया शुरू करवाने की मांग की जाएगी।
देवीदास वाल्मीकि, अध्यक्ष अनुसूचित जाति-ए महापंचायत।
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