जींद को भाखड़ा नहर से मिलेगा पेयजल, 170 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पेयजल की समस्या से जूझ रहे शहर के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब जींद शहर को नरवाना से पास से निकलने वाली भाखड़ा नहर से पेयजल के लिए पानी मिलेगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब सरकार जल्द ही इस परियोजना की डीपीआर तैयार करवा कर इस पर काम शुरू करेगी। इस परियोजना पर करीब 170 करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना है। इसके लिए नरवाना से पांडू पिंडारा तक पाइप लाइन दबानी होगी, जोकि 32 किलोमीटर लंबी होगी। इसके बाद पिंडारा गांव में 30 एकड़ में जलघर बनेगा।
जानकारी के लिए जींद शहर में हुडा क्षेत्र को छोड़कर अन्य शहर में भूमिगत जल की सप्लाई होती है। इसके लिए शहर में करीब 50 ट्यूबवेल लगाए गए हैं। भूमिगत पानी खारा होने के चलते शहर के लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। शहर की पेयजल परियोजना के लिए पिछले चार साल से योजना बन रही थी, लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ रही थी। अब केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत यहां पेयजल मुहैया करवाने की योजना बनी है। शनिवार को जींद पहुुंचे प्रदेश के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री घोषणा में शामिल है परियोजना
यह परियोजना मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल है। करीब दो साल पहले जींद में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इसकी घोषणा की थी। इसके बाद जन स्वास्थ्य विभाग ने परियोजना तैयार कर विभाग को भेजी थी। अब इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।
शहर की गलियों के लिए भी राशि मंजूरी
वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि शहर की गलियों, सीवरेज व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट की पुख्ता व्यवस्था करने समेत अन्य विकास कार्यों पर 21 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। शहर के सेक्टर पांच-छह और हाउसिंग बोर्ड की सड़कों के लिए छह करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। वहीं सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सात करोड़ तथा स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करने पर आठ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
बढे़गी चीनी मिल की क्षमता
वित्तमंत्री ने कहा कि जींद के सहकारी शुगर मिल के विस्तार की परियोजना को सरकार द्वारा मंजूरी प्रदान कर दी गई है। अब मिल की क्षमता को 1600 से बढ़ाकर 2100 टीपीडी किया जाएगा। जल्द ही इस परियोजना पर भी काम शुरू करवाया जाएगा। वहीं वेटरनरी पॉलीक्लीनिक में उपकरण के लिए टेंडर हो चुके हैं और जल्द ही यहां उपकरण स्थापित होंगे।