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दस साल बाद फिर मिड्ढा व गुप्ता परिवार आमने-सामने

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चुनावी समर में दस साल बाद फिर से मिड्ढा और गुप्ता परिवार आमने सामने आ गए हैं। इससे पहले 2009 के चुनाव में वर्तमान भाजपा उम्मीदवार डॉ. कृष्ण मिड्ढा के पिता डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने मांगेराम गुप्ता को मंत्री रहते 7862 मतों से हरा दिया था। लगभग 30 साल जींद की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मांगेराम गुप्ता के बेटे महावीर गुप्ता को इस बार जजपा ने उम्मीदवार बनाया है। दस साल बाद फिर जींद की राजनीति क्या रंग लेगी यह समय बताएगा।
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गौरतलब है कि मांगेराम गुप्ता ने 1977 में आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतकर राजनीति में धमाका किया था। 1982 में बृजमोहन सिंगला ने लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस के उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता को 146 मतों से हरा दिया। हालांकि 1991 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता ने फिर से वापसी की और 16133 मतों से जीत दर्ज की। 1996 में फिर से गुप्ता और सिंगला का मुकाबला हुआ। इस चुनाव में मांगेराम गुप्ता हार गए। इसके बाद वर्ष 2000 व 2005 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता कांग्रेस के टिकट पर इनेलो के उम्मीदवारों को हराकर विधायक बने, लेकिन 2009 में मुकाबला मांगेराम गुप्ता का मुकाबला इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा से हुआ। इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला द्वारा प्रत्याशी बनाए गए डॉ. हरिचंद मिड्ढा राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं होते हुए भी 2009 के चुनाव में 7862 मतों से मांगेराम गुप्ता डॉ. मिड्ढा से हार गए। इसके बाद 2014 के चुनाव में भी फिर से गुप्ता व मिड्ढा का मुकाबला हुआ और गुप्ता ने जीत का मार्जिन कम कर दिया, लेकिन 2257 मतों से डॉ. मिड्ढा जीत गए।
गुप्ता और मिड्ढा परिवारों की दूसरी पीढ़ी के बीच मुकाबला
2019 का विधानसभा चुनाव पूरी तरह से बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच हो रहा है। आठ में से सात चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ने वाले मांगेराम गुप्ता के बेटे महावीर गुप्ता इस बार जेजेपी के टिकट पर मैदान में उतरे हैं। वहीं इनेलो के टिकट पर दो बार विधायक बनने वाले डॉ. हरिचंद मिड्ढा के बेटे डॉ. कृष्ण मिड्ढा भाजपा के उम्मीदवार हैं। देखना होगा कि दोनों परिवारों के बीच राजनीतिक लड़ाई किस मुकाम तक पहुंचेगी। हालांकि कृष्ण मिड्ढा आठ माह पहले हुए उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर विधायक बने थे।
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तीसरे परिवार की भी हो सकती है एंट्री
राजनीतिक परिवारों के वर्चस्व की लड़ाई में पूर्व मंत्री बृजमोहन सिंगला परिवार की भी एंट्री हो सकती है। हालांकि जेजेपी ने अग्रवाल समाज से उम्मीदवार मैदान में उतार दिया है, लेकिन पूर्व मंत्री बृजमोहन सिंगला के बेटे अंसुल सिंगला भी चुनाव लड़ने के लिए प्रयासरत हैं। यदि उन्हें टिकट मिलता है तो वे चुनाव लड़ेंगे और इस प्रकार जींद का चुनाव तीन राजनीतिक घरानों के बीच होगा।
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