बहादुरगढ़। शहर के योगेश कथूनिया ने विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप की चक्का फेंक (डिस्कस थ्रो) स्पर्धा में बुधवार रजत पदक जीता तो योगेश के प्रशंसक खुशी में चहक उठे। योगेश ने 43.17 मीटर दूरी पर चक्का फेंक प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप की चक्का फेंक प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले देखने के लिए योगेश के परिवार के लोग सुबह से ही आतुर थे। परिवार के सभी लोगों ने घर में एक साथ बैठकर मुकाबले देखे। फाइनल मुकाबले में योगेश के प्रदर्शन से सभी खुश हुए। योगेश ने 43.17 मीटर दूरी पर चक्का फेंका और रजत पदक के हकदार बने। हालांकि योगेश ने पिछले दिनों बेंगलुरु में हुई ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप की चक्का फेंक स्पर्धा में रिकॉर्ड (46.79 मीटर) बनाने के साथ ही इस वल्र्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया था।
उसके बाद विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए योगेश पेरिस पहुंचे। तभी से प्रशंसक उनसे पदक की उम्मीद लगाए बैठे थे। योगेश के परिजनों ने पदक की उम्मीद के साथ उसे पेरिस रवाना किया था। टोक्यो पैरालिंपिक में भी योगेश ने रजत पदक जीता था, जबकि पिछली वल्र्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था।
योगेश कथूनिया का परिवार मूल रूप से बहादुरगढ़ के गांव मांडोठी से है। योगेश के माता-पिता तो दिल्ली में रहते हैं, लेकिन उनके दादा व चाचा का परिवार बहादुरगढ़ में बराही रोड स्थित राधा कॉलोनी में रहता है। योगेश के पिता कैप्टन ज्ञानचंद ने कहा कि योगेश ने इस प्रतियोगिता में जीतने के लिए कड़ी मेहनत की थी। चाचा कर्मबीर ने भी खुशी जताई और विश्वास जताया कि अगले पैरालिंपिक में योगेश स्वर्ण पदक जीतेंगे।