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विश्व मिर्गी दिवस : अंधविश्वास से नहीं, इलाज से हरा सकते हैं मिर्गी

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बहादुरगढ़। मिर्गी रोग लाइलाज नहीं है। इसे अंधविश्वास से नहीं बल्कि इलाज से हराया जा सकता है। यह रोग नशीले पदार्थों के सेवन करने, मस्तिष्क में गहरी चोट लगने और मानसिक सदमे से भी हो सकता है। मिर्गी के मरीज को झटके आने पर उसे जूता सुंघाने से बचना चाहिए। इसका इलाज संभव है।
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समय रहते मरीज को डॉक्टर के पास लेकर आए और समय पर अगर इलाज शुरू कर दिया जाए तो मरीज ठीक हो सकता है। इस रोग से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए नागरिक अस्पताल की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
हालांकि, नागरिक अस्पताल में महीने भर में दो-तीन मरीज ही इस बीमारी से पीड़ित पहुंचते हैं। हर साल 10 फरवरी को विश्व मिर्गी दिवस मनाया जाता है।

नागरिक अस्पताल के मेडिसन डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि मिर्गी एक सामान्य न्यूरोलॉजिकल रोग है जिसका समय पर और सही इलाज संभव है। कई मामलों में लंबे समय तक शराब या अन्य नशे का सेवन करने से भी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है जिससे मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं।
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डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि मिर्गी के दौरे के समय मरीज को जूता सुंघाने या झाड़-फूंक कराने जैसे उपाय पूरी तरह गलत और नुकसानदायक हैं। इससे न तो दौरा रुकता है और न ही बीमारी ठीक होती है।
दौरे के समय मरीज को सुरक्षित स्थान पर लिटाना, उसके आसपास की कठोर या नुकीली वस्तुएं हटाना और कपड़ों को ढीला करना ही सही प्राथमिक उपचार है। मुंह में कुछ भी डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
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लक्षण

सांस नली में रुकावट होना, बेहोश हो जाना, मुंह से झाग आना, शरीर का अकड़ना, मरीज का दिमागी संतुलन बिगड़ना, नींद न आना।



ऐसे करें बचाव

-मुंह के बजाय नाक से दवा दी जाए।

-मरीज को बाईं या दाईं करवट लिटा देना चाहिए।

-जूता, चप्पल न सुंघाएं।

-डॉक्टर की सलाह के बिना दवाई बंद न करें, पर्याप्त नींद लें।

-मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं।
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