प्रदेश में तैयार की जा रही देसी नस्ल की गाय को देखने के लिए बुधवार को वर्ल्ड बैंक का डेलीगेशन जिले के गांव खेड़ी खुम्मार में पहुंचा।
इसमें एक सदस्य अमेरिका की और दूसरा सदस्य भारत से रहा। डेलीगेशन के साथ पशुपालन विभाग के क्षेत्रीय चिकित्सक भी गांव में पहुंचे।
अमेरिकन सदस्य को देसी गाय की नस्ल तो पसंद आई ही, साथ ही हरियाणवी संस्कृति से भी काफी प्रभावित हुईं। उन्होंने देसी नस्ल की काफी सराहना की और इस नस्ल का विकास अन्य देशों में भी करने की बात कही।
पशु पालन विभाग की ओर से देसी नस्ल की गाय को बढ़ावा देने के लिए ‘नेशनल डेयरी परियोजना फेस वन’ शुरू की गई है।
इस योजना के तहत गायों को संतुलित एवं उच्च क्वालिटी का चारा दिया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य देसी गाय की नस्ल को सुधारना और उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है।
इस परियोजना के सफलतापूर्वक आगे बढ़ने के कारण वर्ल्ड बैंक के डेलीगेशन ने बुधवार को जिले के खेड़ी खुम्मार गांव का दौरा किया।
डेलीगेशन में अमेरिका निवासी हेलन और भारत से डॉ. मिश्रा शामिल रहे। डेलीगेशन ने मास्टर संजय के घर में पाली जा रही देसी गाय और गांव की एक अन्य गाय को देखा।
पंचकूला से आए परियोजना के संयोजक डॉ. ओपी राव, क्षेत्रीय संयोजक डॉ. आईएस कादियान, डॉ. सुजीत शाह, डॉ. बाली और डॉ. त्रिपाठी मौजूद थे।
तीन जिलों में है यह योजना
परियोजना के क्षेत्रीय संयोजक डॉ. ईश्वर सिंह कादियान ने बताया कि यह योजना प्रदेश के केवल तीन जिलों में ही लागू की गई है।
इसमें झज्जर के अलावा भिवानी और रोहतक जिला शामिल है। उन्होंने बताया कि तीन जिलों में 40 सेंटर बनाए गए हैं, जिससे 80 गांवों को जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि झज्जर जिले में 15, भिवानी जिले में 16 और रोहतक जिले में नौ सेंटर बनाए गए हैं।
हिंदी में कहा नमस्कार व शुभ आनंद
अमेरिका निवासी हेलन को हिंदी नहीं आती है, लेकिन लोगों का अभिवादन उन्होंने हिंदी में किया। वो जिस भी व्यक्ति से मिलती तो उन्हें हाथ जोड़कर नमस्कार करती।
जब वहां से विदा होती तो सभी को शुभ आनंद कहती। हेलन ने कहा कि उन्हें यहां का माहौल और संस्कृति बहुत अच्छी लगी। उन्होंने गाय की देसी नस्ल की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे प्रयास करेंगी कि इस नस्ल को दूसरे देशों में भी विकसित किया जाए।