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नया गांव चौक और टीकरी बॉर्डर पर केंद्र सरकार के खिलाफ गरजीं महिलाएं

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नया गांव चौक पर सभा में मौजूद किसान महिलाएं। - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों को निरस्त कराने की मांग को लेकर टीकरी बॉर्डर, बहादुरगढ़ बाईपास और नया गांव चौक के पास चल रहे धरने की कमान सोमवार को महिलाओं के हाथों में रही। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हजारों की संख्या में महिलाएं आंदोलन में पहुंची। महिलाओं को संयुक्त किसान मोर्चा व विभिन्न किसान संगठनों की ओर से पूरा मान सम्मान किया गया। यहां पर 111 महिलाओं को सम्मानित भी किया। सोमवार को हजारों की संख्या में महिलाएं आंदोलन का हिस्सा रही और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी करती दिखी। पंजाब, हरियाणा व अन्य प्रदेशों से पहुंचे महिलाओं के जत्थों ने एकत्रित होकर प्रदर्शन किया और नारी शक्ति की आवाज भी बुलंद की।
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संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से 8 मार्च को महिला दिवस पर धरनास्थलों पर महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। मंच से लेकर सभा के संचालन व संबोधन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं ने ही निभाई। महिला किसानों ने किसानों के साथ अपनी पूर्ण भागीदारी देते हुए उनकी हौसला अफजाई की और साथ में सरकार को भी चेताया कि अब नारी शक्ति भी अपने अधिकारों को लेकर जाग चुकी हैं। वे किसी भी चुनौतियों से लड़ना अच्छी तरह जानती हैं। जत्थे में शामिल महिलाओं ने कहा कि वे कानून निरस्त करवाकर ही रहेंगी। जहां वे खेत खलिहान व घरों को संभाल रही हैं वहीं उनके परिवार के पुरुष सदस्य बॉर्डर पर जारी धरने पर बैठकर अपने हकों के लिए व खेती बचाने के लिए आवाज भी बुलंद कर रहे हैं। नया गांव चौक के नजदीक ऑटो मार्केट पर चलने वाली सभा का स्थल बदल दिया गया है।
महिलाओं ने कोसा सरकार को
आंदोलन में पहुंची हरियाणा की महिलाओं ने जहां लोक गीतों के माध्यम से भाजपा सरकार पर जहां जमकर कटाक्ष किए। वहीं नारी शक्ति को एकजुट होकर आंदोलन को तेज करने पर बल दिया। महिलाओं ने कहा कि वे अपनी खेती व भविष्य को बचाने के लिए पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर आंदोलन में उनके साथ खड़ी हुई हैं। चूल्हा चौका छोड़कर वे धरने का हिस्सा बनी हुई हैं। महिला संतोष, प्रीतकौर, सोनिया, हरविंद्र, सुदेश समेत कई अन्य ने कहा कि सरकार पूरी तरह से हठधर्मिता पर अड़ी हुई है। शांतिपूर्ण तरीके से किसान अपनी आवाज उठाते हुए कानून को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं मगर किसी न किसी तरह से किसानों पर ही दबाव बनाया जा रहा है। महिलाओं ने कहा कि जब सरकार अड़ियल रवैया अपना रही है तो किसान कहां पीछे हटने वाला है। वह भी तीनों कानूनों को निरस्त करके ही अपने घरों को लौटेगा और वह उनका पूरा साथ इसमें देती रहेंगी।
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26 नवंबर से आंदोलनरत हैं किसान
टीकरी बॉर्डर पर किसान 26 नवंबर से धरनारत हैं। इस बीच किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन अभी गतिरोध कम नहीं हुआ है और वार्ता में बात सिरे नहीं चढ़ पाई। सरकार जहां कानूनों में फेरबदल की बात कह रही है वहीं किसानों ने कृषि कानूनों को निरस्त करने से कम कुछ भी मानने से इंकार किया हुआ है। 22 जनवरी के बाद से किसानों व सरकार के बीच कोई वार्ता नहीं हुई है। जिस कारण आंदोलन लंबा खिंचता नजर आ रहा है। सरकार के रुख को देखते हुए किसान आंदोलन को मजबूत करने की रणनीतियां अब महिला किसान भी बना रही हैं।
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