बहादुरगढ़। क्षेत्र में वीरवार को परंपरागत तरीके से होलिका का पूजन किया गया। कई स्थानों पर समारोह भी आयोजित हुए। महिलाओं ने दिनभर व्रत रखा। क्षेत्र में 30 से ज्यादा स्थानों पर होलिका दहन किया गया।
शहर में विभिन्न स्थानों पर होलिका बनाई गई थी। होलिका पूजन के लिए सुबह से ही महिलाएं नए वस्त्र पहन कर अपने बच्चों के साथ घरों से निकलने लगीं। महिलाओं समूह में भजन गाती हुईं होलिका तक पहुंचीं और गोबर के बने ढाल-बुरकलों की माला चढ़ाई और पूजा की। 22 फुटा रोड, नई बस्ती स्थित बिजली घर, सैनीपुरा, शंकर गार्डन, नेताजी नगर, आर्यनगर किला मोहल्ला, सेक्टर-2, जटवाड़ा मोहल्ला, सत्यनारायण मंदिर के निकट, अशोक नगर, धर्म विहार व छोटूराम नगर समेत तमाम स्थानों पर होलिका का दहन किया गया। महिलाओं ने व्रत रखने व सास का आशीर्वाद लेने की परंपरा को भी निभाया। पंडित बद्रीप्रसाद ने कहा कि होलिका का दहन प्रहलाद की भक्ति से जुड़ा हुआ है। प्रहलाद जब भगवान के ध्यान में लीन थे तो उनके पिता हिरण्यकश्यप ने उनका ध्यान तुड़वाने के लिए अपनी बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था, की गोद में बैठा दिया था और उसके चारों ओर आग जला दी थी। प्रहलाद को भगवान ने बचा लिया, मगर होलिका जलकर भस्म हो गई थी। इसी परंपरा को निभाते हुए होलिका का दहन किया जाता है।
-फोटो 51 : होली पूजन के दौरान मालाएं पहनकर जाते बच्चे। संवाद
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