एक सप्ताह से चल रहे सिविल अस्पताल के विवाद को लेकर महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने मंगलवार को शहर का दौरा किया।
उन्होंने पीड़ित महिला और उनके परिजनों से बातचीत की और एसपी से भी मामले की जानकारी ली। उसके बाद उन्होंने सिविल अस्पताल के लेबर वार्ड का दौरा किया और वहां भर्ती महिलाओं से बातचीत भी की।
तीन घंटे की जांच के बाद सुमन दहिया ने कहा कि पूरे मामले में सिविल अस्पताल की गंभीर लापरवाही सामने आई है। सीएमओ ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए पुलिस को शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराया है।
12 जून को अंबोली निवासी महिला बबली को डिलीवरी के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रात लगभग आठ बजे बबली को डिलीवरी रूम में ले जाया गया। इसी दौरान अचानक बिजली चली गई।
डिलीवरी रूम में डॉक्टर और स्टाफ नर्स नहीं होने की सूचना पर पहुंची अमर उजाला टीम ने वहां हालात देखे और मोबाइल की रोशनी में डिलीवरी की खबर छापी।
इसके बाद सीएमओ डॉ. रमेश धनखड़ ने बरानी गांव निवासी बीरेंद्र और चार-पांच अन्य युवकों के खिलाफ जबरदस्ती लेबर रूम में घुसने और महिला की डिलीवरी की वीडियो बनाए जाने की शिकायत दी थी।
इस पर पुलिस ने युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने झज्जर पहुंचकर मामले की पूरी जांच की।
इस दौरान सीएमओ डॉ. रमेश धनखड़ सिविल अस्पताल में नहीं थे। सुमन दहिया ने कहा कि अगर सीएमओ नहीं आ रहे हैं तो कोई बात नहीं। उन्हें समन देकर चंडीगढ़ बुला लेंगे।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से बरती गई लापरवाही की बात जांच में भी सामने आने की बात बताई।
सुमन दहिया ने अंबोली निवासी महिला बबली और उनके परिजनों से बातचीत की। उन्होंने डिलीवरी रूम में किसी भी प्रकार की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी किए जाने की बात से साफ इंकार कर दिया।
वार्ड में तैनात सिक्योरिटी गार्ड ने भी बताया कि फोटोग्राफर डिलीवरी रूम के अंदर नहीं गया। महिला के परिजनों के रिकॉर्डिंग नहीं किए जाने के बयान की सुमन दहिया ने पुष्टि की है। बबली के जेठ रामशरण ने दहिया को बताया कि सिविल अस्पताल में बबली की डिलीवरी के समय लाइट चली गई थी।
वे सभी बबली की सुरक्षा को लेकर परेशान हो गए थे। वहीं इस संबंध मेें सीएमओ डॉ. रमेश धनखड़ से कई बार बात करने का प्रयास किया था।
‘सिविल अस्पताल के लेबर वार्ड के डिलीवरी रूप में कोई भी रिकार्डिंग नहीं की गई तथा न ही फोटो उतारे गए हैं। यह बात तीन घंटे की जांच में निकलकर सामने आई है।
पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन ने गंभीर लापरवाही बरती है। इसके लिए सीएमओ जिम्मेदार हैं। आयोग सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रदेश सरकार को लिखेगा।’ -सुमन दहिया, उपाध्यक्ष महिला आयोग