इसके साथ ही बैठक में सरपंच के बजाय उनके पति की ओर से ग्रामीणों से बहस करने के आरोप लगे हैं। ग्राम सचिव सुमन गुलिया ने ग्रामीणों व पंचों के इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि बैठक की सूचना मुनादी के माध्यम से सभी को दी गई है।
आगे कहा कि कुछ पंच व ग्रामीण जान-बूझकर सरपंच व उनके पति के साथ बहस कर रहे थे। रही बात कोरम की तो बैठक में पर्याप्त संख्या में ग्रामीण थे जिनकी मौजूदगी में विकास कार्यों के साथ-साथ अन्य एजेंडे भी पास किए गए हैं।
गांव खरहर के पंच अमित, राजरानी, सुनील, हरीश, अंजलि, जोगेंद्र आदि का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से ग्रामसभा बैठक की लिखित सूचना नहीं दी जा रही और न ही बैठक में बुलाया जाता है। कागजों में उनकी मौजूदगी दिखाकर फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए कोरम पूरा कर बैठकों को सफल दर्शाया जा रहा है।
पंचों ने मांग उठाई कि अब तक दिखाई गई सभी ग्राम सभा बैठकों के दस्तावेजों की जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक पंचायत फंड पर रोक लगाई जाए। मंगलवार को बुलाई बैठक में भी सरपंच व ग्राम सचिव समय पर नहीं पहुंचे। ग्रामीण इंतजार करते रहे।
करीब डेढ़ घंटा बाद दोनों पहुंचे और उनसे जवाब मांगा तो सरपंच पति बेवजह हंगामा करने लगे। इस पर दोनों पक्षों में काफी देर तक हंगामा हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि सवाल पूछे जाने पर ग्राम सचिव सुमन गुलिया कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। सरपंच पिंकी देवी ने भी ग्रामसभा में एक शब्द नहीं बोला।
इस दौरान बैठक में सरपंच पति के हस्तक्षेप करने और ग्रामीणों से बहस करने से स्थिति और बिगड़ गई जिसका वीडियो भी ग्रामीणों ने बनाया। इस कारण बैठक में भारी हंगामा हुआ।