सामान्य अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को करीब चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है क्योंकि अल्ट्रासाउंड करने के लिए मात्र एक चिकित्सक हैं और वह भी सामान्य अस्पताल के एसएमओ का चार्ज संभाले हुए हैं। वे दोपहर तक अपने कार्यालय का काम निपटाते हैं और दोपहर बाद मरीजों के अल्ट्रासाउंड करते हैं। सामान्य अस्पताल में हर रोज 40 से 50 अल्ट्रासाउंड किये जाते हैं। इनमें करीब 20 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किये जाते हैं। अगर गर्भवती महिलाएं अधिक आती हैं तो उन महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए पैनल में शामिल प्राइवेट अस्पतालों में भेज दिया जाता है। इन महिलाओं को बार-बार निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पर मजबूर होना पड़ता है।
मरीजों को भूखे-प्यासे रहने पर होना पड़ता है मजबूर
सामान्य अस्पताल में अगर मरीजों के खाली पेट अल्ट्रासाउंड करवाना हो तो उन्हें दोपहर तक खाली पेट रहने पर मजबूर होना पड़ता है। क्योंकि उनके अल्ट्रासाउंड एसएमओ डॉ संजय सचदेवा को करने होते हैं। वे दोपहर तक अपने कार्यालय का काम निपटाने के बाद मरीजों के अल्ट्रासाउंड करने के लिए आते हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों के पास इंतजार करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचता। उनके आने के बाद मरीजों को अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ता है। जिससे मरीजों की परेशानी और अधिक बढ़ जाती है।
निजी अस्पतालों के चक्कर लगाती हैं महिलाएं
सामान्य अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं के अगर अल्ट्रासाउंड करवाने हो तो 20 से अधिक महिला होने पर निजी अस्पतालों की पर्ची देकर भेज दिया जाता है। निजी अस्पतालों में भी पांच से अधिक एक दिन में अल्ट्रासाउंड नहीं किए जाते हैं। उसके बाद उन्हें दूसरे दिन आने के लिए बोला जाता है। हालांकि गर्भवती महिलाओं के निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड फ्री किये जाते हैं। सरकारी अस्पताल की पर्ची पर महिलाओं के अल्ट्रासाउंड पर आने वाले खर्च को स्वास्थ्य विभाग वहन करता है। अगर दूसरे दिन महिलाएं फिर आती हैं तो उन्हें अस्पताल से दोबारा से पर्ची पर मोहर लगवाने के लिए सामान्य अस्पताल भेज दिया जाता है। ऐसी स्थिति में महिलाएं अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाती रहती हैं।
सामान्य अस्पताल में नई अल्ट्रासाउंड मशीन आने के बाद भी एएनसी के 20 अल्ट्रासाउंड किये जाते हैं। अगर उससे ज्यादा एएनसी के अल्ट्रासाउंड करने होते हैं तो उन्हें पैनल में शामिल दो अस्पतालों में भेज दिया जाता है।
-डॉ संजय सचदेवा, एसएमओ, सामान्य अस्पताल, झज्जर।