म्हारा गांव-जगमग योजना के विरोध में पांच गांवों की ओर से प्रशासन को एक सप्ताह के लिए दिया गया अल्टीमेटम खत्म हो गया है। प्रशासन ने योजना वापस नहीं ली तो अब ग्रामीणों ने बिजली के बिल की अदायगी न करने का एलान कर दिया है। दस दिन पहले प्रशासन और बिजली निगम के अधिकारियों को ग्रामीणों ने अल्टीमेटम दिया था कि एक सप्ताह में उनके घरों के बाहर लगाए मीटर को हटाया नहीं तो वह स्वयं मीटरों को उखाड़ कर फेंकेंगे। प्रशासन की ओर से योजना को वापिस लेने और ग्रामीणों के अल्टीमेटम पर कोई संज्ञान नहीं लिया है।
वहीं निगम अधिकारियों का कहना है कि गांव के कुछ व्यक्ति ही योजना का विरोध कर रहे हैं, जबकि अधिकतर ग्रामीण योजना के अनुसार मिल रही अतिरिक्त बिजली से खुश है। योजना के अनुसार गांव में सभी बिजली के तार बदल दिए गए हैं और बिजली भी अन्य गांवों के मुकाबले 4 घंटे ज्यादा सप्लाई की जा रही है। बिजली सप्लाई से ग्रामीण खुश भी है मगर नए मीटरों को विरोध कर रहे हैं।
अल्टीमेटम का समय खत्म होने और प्रशासन की ओर से सहयोग नहीं मिलने पर मुंडाखेड़ा गांव में जगमग योजना के विरोध में दरियापुर, लगरपुर, देवरखाना व लोहट गांव के सरंपचों व पंचों सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने एकमत से विरोध किया है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनके घरों से उखाड़े गए बिजली के मीटर वापस उनके घरों में नहीं लगाए गए तो इन पांच गांवों में से कोई भी बिजली उपभोक्ता बिजली के बिल के नाम पर विभाग व सरकार को एक रुपया भी नहीं देंगे।
ग्राम सरपंच देवरखाना मंगतराम, चांद लगरपुर, रकेश लोहट सतबीर पंच दरियापुर, ग्राम सरपंच मुंडाखेड़ा रमेश पहलवान, नफे सिंह, रामकवार, छोटूराम, भरत सिंह, जय भगवान, जगदीश, राजबीर, बनी सिंह पंच, श्रीभगवान, अनिल कुमार, राजगीर ठेकेदार, कमल सिंह, हरीश सहित सैकड़ों का कहना है कि अब कोई भी ग्रामीण बिजली का बिल नहीं भरेगा।
अधिकारी बोले
उधर, निगम के एसडीई खूबचंद का कहना है कि सरकार और निगम की योजना के अनुसार काम किया जा रहा है। फिलहाल गांवों में नए मीटर लगाने पर काम किया गया है और इस योजना को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जैसा विभागीय आदेश होगा उसके अनुसार काम किया जा रहा है और अब तक भी विभागीय आदेशों की पालना होती रही है।