झज्जर। भदाना गांव की चौपाल में भूगोल प्राध्यापक मुकेश शर्मा व उनकी बेटी अंशुल शर्मा ने मिलकर महान धावक फ्लाइंग सिख के नाम से प्रसिद्ध मिल्खा सिंह के निधन पर उनका एक विशाल रेखाचित्र बनाकर श्रद्धांजलि दी। मुकेश शर्मा ने बताया कि मिल्खा सिंह भारत के खेल इतिहास के सबसे सफल एथलीट थे।
मुकेश शर्मा ने बताया कि 1960 के दशक में रोम ओलंपिक में पदक चूकने का मिल्खा सिंह के मन में खासा मलाल था। लेकिन इसी साल पाकिस्तान में आयोजित इंटरनेशनल एथलीट कंपटीशन में हिस्सा लेने का न्योता मिला। पाकिस्तान में मिल्खा सिंह का प्रदर्शन देखने के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख का खिताब दिया और कहा कि आज तुम दौड़े नहीं उड़े हो। इसलिए हम तुम्हें फ्लाइंग सिख का खिताब देते हैं।
मिल्खा सिंह ने 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स में 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में रिकॉर्ड बनाए। इसके बाद उसी साल आयोजित एशियम गेम्स में 200 मी और 400 मी की दौड़ में भी स्वर्ण पदक जीता। इसी साल इंग्लैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में ने मिल्खा सिंह ने 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। आजाद भारत में मिल्खा सिंह स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। इस दौरान भूतपूर्व सैनिक देवीदत्त शर्मा, सूबेदार सुभाष शर्मा, रमेश कौशिक, श्रीभगवान कौशिक, केशव शर्मा, अर्जुन शर्मा व अलीशा शर्मा ने मौजूद रहकर मिल्खा सिंह को अपनी श्रद्धांजलि दी। संवाद