कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों को समर्थन देने के लिए शनिवार को
पंजाब से भारी संख्या में वकील, नंबरदार और कलाकार टीकरी बार्डर पहुंचे। इन लोगों ने किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि वे आंदोलन के अंजाम तक पहुंचने तक किसानों के साथ हैं।
आल इंडिया किसान मजदूर संघर्ष समिति (एकेएमएससी) के मंच पर पंजाब बार एसोसिएशन के नेता दर्शन सिंह बब्बी, नंबरदार संघ के नेता शारदा सिंह, गायक और गीतकार बिट्टू खन्नावाला के नेतृत्व में वकीलों, नंबरदारों और कलाकारों की एक बड़ी टुकड़ी पहुंची। संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि किसान मजदूर संघर्ष की शुरुआत पंजाब की धरती से हुई थी, लेकिन तीन नए केंद्रीय कृषि कानून जनविरोधी कानून हैं। इसलिए किसान जत्थेबंदियों के कुशल नेतृत्व के कारण यह संघर्ष पूरे भारत में फैल गया। दर्शन सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा ये कानून बनाने से पहले 2006 में बिहार में ही इस कानून का प्रतिकूल प्रभाव महसूस किया जा चुका था, जिसके कारण बिहार जैसे राज्यों के बड़े व्यापारी सस्ते धान व गेहूं खरीदकर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में भारी मुनाफे पर बेच रहे थे। इसलिए हम सभी को मिलकर लड़ने की जरूरत है।
भाकियू एकता (उगराहा) के उपाध्यक्ष जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने कहा कि इस किसान संघर्ष ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। संगठन व त्याग का मंत्र दिया है। देश की फासीवादी सरकारें हमें लूट रही हैं और बड़े कारपोरेट घरानों का पेट भर रही हैं। उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों को देशद्रोह के आरोप में जेलों में डाला जा रहा है। देश के बुद्धिजीवी, विभिन्न सार्वजनिक लोकतांत्रिक संगठनों के कार्यकर्ता और नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ लड़ रहे मुसलमानों को भी जेल में डाल दिया जाता है। अपने हक की लड़ाई लड़ने वालों पर राजद्रोह का भी आरोप लगाया गया है। इन राजद्रोह कानूनों पर आज सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा भी चर्चा की जा रही है कि अंग्रेजों ने भारत के गुलाम लोगों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ इन कानूनों को लागू किया था जिनकी अब आवश्यकता नहीं है। लोंगोवाल ने कहा कि भारत जैसे लोकतंत्र में इस कानून को लागू करना गैर-जिम्मेदाराना कृत्य है। उन्होंने इन कानूनों को तत्काल निरस्त करने और इन कानूनों के तहत गिरफ्तार किए गए सभी कार्यकर्ताओं की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की।
महिला संगठन की नेता कुलदीप कौर कुस्सा ने कहा कि आर्थिक सुधारों के नाम पर प्राकृतिक कृषि में नए बीज, उर्वरक और मशीनरी की शुरुआत की गई, जिसने साम्राज्यवादी नीतियों के तहत उर्वरक और मशीनरी निर्माण कंपनियों को समृद्ध किया। लेकिन किसान कर्ज में दबते गए। गायक और गीतकार बिट्टू खन्नावाला ने संगठन की आचार संहिता, अनुशासन और सामरिक दृष्टिकोण के लिए भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) की सराहना की। दरबारा सिंह छाजला, मोथू सिंह कोटरा, सुखपाल सिंह मानक कनकवाल, जगदेव सिंह भैनीबाघा, गुरमीत सिंह फाजिल्का ने भी मंच से संबोधित किया।