24jjrp07- सिविल अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे मरीज। संवाद
- फोटो : रायबरेली क्लब में शुक्रवार को आयोजित समारोह को संबोधित करते नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा।
झज्जर। सिविल अस्पताल में पिछले कई साल से चर्म रोग विशेषज्ञ का पद खाली है। इसके चलते यहां आने वाले चर्म रोग मरीजों को या तो आयुर्वेदिक व होम्योपैथी चिकित्सक के पास भेजा जाता है या फिर मरीज को बाहर निजी अस्पतालों से इलाज करवाना पड़ता है।
जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कई बार चर्म रोग विशेषज्ञ सहित अन्य खाली पदों को भरने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अब तक इनको भरा नहीं गया है। सिविल अस्पताल में पिछले लगभग तीन साल से चर्म रोग का कोई चिकित्सक नहीं है।
सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 50 से 70 के आसपास चर्म रोग के मरीज आते हैं, लेकिन उन सभी को आयुर्वेदिक व होम्योपैथी चिकित्सक के पास भेजा जाता है। यदि कोई आयुर्वेदिक या होम्योपैथी इलाज नहीं करवाना चाहता तो उनको निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
जहां पर ओपीडी से लेकर महंगी दवाओं का असर सीधा आम जनता की जेब पर पड़ता है। बाहर इलाज करवाने पर कम से कम 200 से 300 रुपये ओपीडी और लगभग एक हजार 1500 रुपये की दवा एक बार में लेनी पड़ती है। इसके अलावा टेस्ट की फीस अलग से ली जाती है। ऐसे में मरीजों को आर्थिक चपत लगती है। यदि सरकारी अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ आ जाए तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।
अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़
सिविल अस्पताल में दो दिन से ओपीडी जारी है, लेकिन त्योहार के चलते लोगों को छुट्टी का अहसास होने के चलते अस्पताल में भीड़ कम थी। भाई-दूज के त्योहार के बाद शुक्रवार को सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या ज्यादा रही। पर्ची काउंटर से लेकर ओपीडी के बाहर मरीजों की भीड़ रही। शुक्रवार को लगभग 1200 मरीजों की ओपीडी हुई। इसमें जुकाम, बुखार, आंखों, हड्डी रोग के मरीजों की संख्या ज्यादा रही।