भंभेवा गांव के वार्ड छह और सात में पीने के पानी की परेशानी से गुस्साई महिलाओं ने शुक्रवार को गांव के जलघर पर ताला जड़ दिया। महिलाओं ने मटके फोड़कर अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। सूचना मिलने पर सात घंटे बाद डीघल पुलिस के साथ जलापूर्ति विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं की समस्याएं सुनकर इसके समाधान का भरोसा दिलाया, जिसके बाद जलघर का ताला खोल दिया गया।
गांव भंभेवा के जलघर पर ताला लगाने वाली वार्ड छह और सात की महिलाओं ने बताया कि पिछले तीन सालों से उनके यहां पानी की सप्लाई नदारद है। उन्हें दूरदराज से पानी लाना पड़ता है। इस बारे में कई बार विभाग के अधिकारियों को अवगत कराकर समस्या के समाधान की अपील की गई। हर बार भरोसा तो दिलाया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। सुनीता ने बताया कि पानी की सप्लाई नहीं आने के कारण उन्हें दूरदराज के खेतों से पानी लाना पड़ रहा है। गर्मी में इतनी दूर से पानी लाने में परेशानी होती है।
हालात यह हैं कि एक-एक बूंद पानी इस्तेमाल करते समय सौ बार सोचना पड़ता है। शीला ने बताया कि पीने के पानी का इंतजाम भी मुश्किल हो रहा है। हर रोज पहली चिंता यही होती है कि पानी का इंतजाम करना है। उन्होंने कहा कि अधिकारी आते हैं और मौका देखकर चले जाते हैं, लेकिन समस्या का समाधान कोई नहीं करता। ऐसे में मजबूरी के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। महिलाओं ने पहले जलघर पर ताला जड़ा और उसके बाद मटके फोड़कर अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन के दौरान जलघर पर कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं था। ऐसे में महिलाएं जलघर के बाहर ही बैठ गईं।
महिलाओं ने जलघर पर ताला सुबह 11 बजे लगाया था, लेकिन जलापूर्ति विभाग के अधिकारियों को मौके पर पहुंचने में सात घंटे लग गए। गांव में पहुंचे एसडीओ आरके गुप्ता, जेई प्रदीप जैन के साथ पुलिस भी मौके पर पहुंची। उन्होंने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे तुरंत समस्या के समाधान की मांग पर अड़ गईं।
इसके बाद ग्रामीणों का आश्वासन दिया गया कि उनकी बंद पड़ी पेयजल लाइन का काम जल्द करवा दिया जाएगा। ठेकेदार के बीमार होने से काम में देरी हुई है, लेकिन इसे दोबारा से जल्दी शुरू कराया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों ने महिलाओं को ताला खोलने के लिए मना लिया।
ग्रामीण देवेंद्र ने बताया कि गांव में पानी की समस्या पिछले तीन वर्षों से है। अभी गांव की महिलाओं ने जलघर पर ताला जड़ा है। अगर इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा। अनिल ने बताया कि वार्ड छह और सात के लोगों को मजबूरी में पानी खरीदना भी पड़ता है। पानी की समस्या के प्रति अधिकारियों की अनदेखी से ग्रामीणों में रोष पनप रहा है। विभाग को चाहिए की गांव में पीने के पानी की समस्या का समाधान जल्द से जल्द करवाएं।