मानवाधिकार दिवस के अवसर पर वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय की स्वयंसेविकाओं ने शिक्षण-अभ्यास (इंटर्नशिप) के दौरान अपने-अपने स्कूलों के विद्यार्थियों को मानवाधिकारों के प्रति जागरूक किया। इस दौरान स्वयंसेविकाओं ने मानवाधिकारों की परिभाषा, महत्व और उनके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
स्वयंसेविकाओं ने विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए बताया कि शिक्षा, समानता और स्वतंत्रता जैसे अधिकार हमारे जीवन का मूलभूत हिस्सा है। साथ ही इन्हें बनाए रखने और सभी के साथ समान व्यवहार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कुछ स्कूलों में स्वयंसेविकाओं ने समूह चर्चा के माध्यम से मानवाधिकारों की जानकारी दी।
प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने कहा कि मानवाधिकार दिवस पर इस तरह के गतिविधि छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी और जागरूकता का विकास करते हैं। स्कूल के बच्चों ने स्वयंसेविकाओं के साथ अपने विचार साझा किए और इस गतिविधि को बेहद प्रेरणादायक बताया।
उन्होंने महाविद्यालय द्वारा गोद लिए हुए गांव नूना माजरा में विद्यार्थियों को मानवाधिकारों के महत्व के बारे में जागरूक किया और छात्रों को समझाया कि मानवाधिकार प्रत्येक व्यक्ति के जन्मसिद्ध अधिकार हैं। ये अधिकार किसी भी प्रकार के भेदभाव जैसे जाति, धर्म, लिंग, भाषा, रंग, राष्ट्रीयता से ऊपर उठकर सभी को समान रूप से प्रदान किए जाते हैं।
मानवाधिकारों का मूल उद्देश्य हर व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता के साथ जीवन जीने का अवसर देना है। कार्यक्रम का आयोजन एसएस क्लब, लीगल लिटरेसी सेल, वाईआरसी इकाई व आउटरीच सेल द्वारा करवाया गया।