हरियाणा के झज्जर जिले के जैविक कृषि उत्पादों की धूम हर तरफ मची है। चाहे वह फल हों या सब्जियां। जिले के अनेक किसान जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में पहुंचा रहे हैं। इससे वे न केवल मोटा मुनाफा कमाते हुए अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि और लोगों के लिए मिसाल बन रहे हैं।
फिलहाल अश्वनी का बाग ढाई साल का हुआ है। बाग 3 साल का होने पर उसकी आमदनी 5 लाख से अधिक पहुंच जाएगी। फिलहाल अश्वनी धनखड़ ने अपनी एक एकड़ भूमि में 950 अमरूद के पौधे लगाकर तैयार किए गए हैं। वहीं एक एकड़ में 4 माह पहले ही उसने ताइवान पिंक किस्म के अमरूद के पौधे लगाए हैं जो पूरी तरह से 3 साल में बाग तैयार होगा।
अश्वनी धनखड़ गुरुग्राम की एक कंपनी में कलेक्शन मैनेजर की नौकरी करते थे और सितंबर 2020 में उन्होंने नौकरी छोड़कर जैविक खेती अपनाई और इसी क्षेत्र में पूरा ध्यान लगा चुके हैं। उनका कहना है कि उनका अमरूद शुगर व वजन कम करने में काफी सहायक है क्योंकि सेब में 125 एंटीऑक्सीडेंट होते हैं और उनके अमरूद में 425 ग्राम एंटीऑक्सीडेंट हैं।
अमरुद में एंटीऑक्सीडेंट अधिक होते हैं। इस लिए अमरुद शुगर के मरीजों के लिए लाभदायक है। जैविक फल व सब्जियां तो शुगर के मरीजों के लिए ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति के लिए बेहतर होते हैं। - फिजिशियन डॉ. मोनिल कादयान