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धरनारत पंजाब के किसान बोले- धन की कोई कमी नहीं, मिल रहा है सबका समर्थन

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दिल्ली-रोहतक मार्ग पर पंडित श्रीराम मेट्रो स्टेशन के नजदीक पंजाब के किसानों ने लगाया तंदूर। - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पर डेरा डाले बैठे पंजाब के किसान हर तरह से संसाधनों से संपन्न हैं। उनके द्वारा दावा किया जा रहा है कि अगले कई माह तक आंदोलन करने के लिए उनके पास न तो धन की कमी है और न ही भोजन की कमी है। उन्होंने अपने क्षेत्र के गांवों से न केवल एक बड़ी राशि एकत्रित की है, बल्कि दिल्ली की सीमा पर लंबे समय तक रहने के लिए चावल, आटा, मूंग, मोठ, चीनी, डीजल और पेट्रोल जैसी चीजों को भी स्टॉक किया है। स्थानीय निवासी धरनारत किसानों को सब्जियां, फल, दूध, लस्सी, मिठाई और दूसरी खाने की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।
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किसानों ने अब अपने राशन को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा है। फिलहाल स्थानीय लोगों द्वारा सहयोग स्वरूप दिए गए खाद्य पदार्थ इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब के जिला संगरूर के गांव बलियान से आए गुरलाल सिंह ने कहा कि अगर अगले छह माह तक आंदोलन जारी रहने पर भी हमें कोई समस्या नहीं है। हमारे पास सभी आवश्यक वस्तुएं पर्याप्त मात्रा में हैं। विरोध की तैयारी नवंबर में शुरू हुई थी और हमने इसके लिए अपने गांव से 3 लाख रुपये से अधिक का फंड एकत्रित किया है। यह राशि भूमि मालिकों द्वारा 150 रुपये प्रति एकड़ और 40 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से दान की गई है। उन्हाेंने बताया कि धनराशि एकत्रित करने के लिए पंजाब के अधिकतर गांवों द्वारा इसी तरह का तरीका अपनाया गया। भटिंडा के परमजीत सिंह ने बताया कि हम पंजाब के किसान मेहनत करके कमाते हैं, अब अपने हकों की लड़ाई में खर्च करने में हमें कोई हिचक नहीं है।
टीकरी बॉर्डर के निकट अपने साथियों के साथ डिवाइडर पर बैठे मुक्तसर के जसविंदर सिंह ने कहा कि हमने डीजल खरीदने पर 3 लाख रुपये में से कुछ पैसे खर्च किए हैं। जरूरत पड़ी तो हमारे गांव के लोग और अधिक दान करने के लिए तैयार हैं। धन की कोई समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि बहादुरगढ़ पहुंचने की शुरुआत के दो-तीन दिनों तक उन्होंने दूध खरीदने के लिए पैसे खर्च किए थे। लेकिन अब स्थानीय लोग न केवल दूध बल्कि पानी, लस्सी, लड्डू, हलवा, जलेबी, फल और सब्जियां भी मुहैया करा रहे हैं। यहां तक कि हरियाणा के लोगों द्वारा हर रोज लंगर का आयोजन भी किया जा रहा है। इसलिए हमें अब अपने राशन का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है। इसको संकट के समय के लिए सुरक्षित रखा गया है। आंदोलन लंबा चला तो ये सामान काम आएगा। लेकिन लड़ाई जीतकर ही जाएंगे। मानसा से आए सतविंदर ने कहा, कई अनिवासी भारतीय (एनआरआई) भी हमारे निरंतर संपर्क में हैं। वे आंदोलन के लिए दान करना चाहते हैं। लेकिन हमने उनकी पेशकश को गांवों के स्तर पर बनाई गई आंदोलन कमेटी के अधिकार में रखा है।
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