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किसानों ने मंच से की जेलों में बंद एक्टिविस्टों को रिहा करने की मांग

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बहादुरगढ़। कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए आंदोलन कर रही भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) ने मंच से विभिन्न जेलों में बंद बुद्धिजीवियों, नाटककारों और प्रजातांत्रिक कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग की गई। इस दौरान एक नाटक का आयोजन भी किया गया।
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गुलाब कौर नगर के मंच से एक्टिविस्टों की रिहाई की मांग करते हुए विभिन्न संगठनों के नेताओं ने कहा कि वे मेहनतकशों की आवाज उठाते हैं। भ्रष्टाचार का विरोध करते हैं। इसलिए ऐसे एक्टिविस्टों को जेलों में बंद कर सरकार मेहनतकशों के साथ नाइंसाफी कर रही है। उनके परिवारों को पहले दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के लिए निशाना बनाया गया और फिर हिंसा के लिए जिम्मेदार होने के कारण जेलों में डाल दिया गया। ऐसे मामलों में, उनके लिए बोलना हमारा कर्तव्य है। भाकियू एकता के राज्य सचिव सिंगारा सिंह मान ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाले कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि देश के लोकतांत्रिक संगठनों और डेमोक्रेटिक राइट्स काउंसिल पंजाब द्वारा जेलों में बंद लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की रिहाई के लिए 1 से 15 जून तक पखवाड़े का आयोजन किया गया है। जिला बठिंडा की महिला शाखा की वरिष्ठ उपाध्यक्ष परमजीत कौर कोटरा ने कहा कि गंभीर मामलों में अवैध रूप से जेलों में बंद भारत के बुद्धिजीवियों और लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई की जानी चाहिए।
किसान नेता रूप सिंह चन्ना ने कहा कि पिछले दिनों तेज हवाओं और आंधी के कारण मंच पर लगे टेंट और पाइप तीन-चार बार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में संगठन ने अब मंच के लिए एक स्थायी शेड बनाने की योजना बनाई है। अगले कुछ दिनों में मंच तैयार हो जाएगा। डीएमसी लुधियाना के पूर्व डॉक्टर और उनकी एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण मिश्रा ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि अगले सप्ताह से कैंप लगाकर मरीजों की नि:शुल्क जांच करेंगे।
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हरविंदर सिंह दीवाना के निर्देशन में चेतना कला केंद्र बरनाला ने ऽमेकिंग नॉइज इन पंजाबऽ नाटक प्रस्तुत किया। गुरप्रीत सिंह नूरपुरा ने मंच प्रबंधन संभाला। बिट्टू मल्लन, युवराज सिंह घुदानी, नाहर गुमटी, परमजीत कौर समुरा, मंजीत सिंह घरचोन और सीता रानी फाजिल्का ने भी सभा को संबोधित किया।
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