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किसान आंदोलन चला रहा बांस कारीगरों का रोजगार

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बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन के कारण शहर में कई तरह के दुकानदारों का रोजगार चल रहा है। झोपड़ी बनाने के लिए बांस बेचने वालों और बांस के कारीगरों को भी बहुत अच्छा रोजगार मिला है। गर्मी से बचने के लिए आंदोलनकारी किसानों ने टीकरी बॉर्डर पड़ाव में अपने टेंटों को बांस की झोपड़ियों के रूप में बदल लिया है।
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खजूर की चटाई, पराली और बांस की खरपच्चियों से बनी झोपड़ी गर्मी से बचने में बहुत मदद करती है। इसलिए आजकल की भीषण गर्मी में इन झोंपड़ियों में किसानों को बहुत सुख मिल रहा है। फिलहाल टीकरी बॉर्डर से जाखोदा तिराहे के आगे तक किसानों ने एक हजार से अधिक झोंपड़ियां बना ली हैं। लोहे की ट्रॉलियां तेज धूप में तपती हैं, इसलिए किसानों ने ट्रालियों में बने टेंटों को इस तरह की झोपड़ियों में बदल लिया है। बांस की टाटी (दीवार) पर हरे रंग का कपड़ा लगाने से धूल मिट्टी या गर्म हवा भी अंदर नहीं आ पाती। संगरूर के किसान कीरत सिंह ने बताया कि वे इन झोपड़ियों को बांस का सामान बनाने वाले कारीगरों से बनवाते हैं। इससे इन कारीगरों को और बांस बेचने वाले दुकानदारों को अच्छा रोजगार मिला हुआ है। कई किसान बांस तक भी पंजाब से ही ले आते हैं। लेकिन बहादुरगढ़ व नजफगढ़ के दुकानदारों की जमकर बिक्री हो रही है। कारीगर रामभरोसे ने बताया कि एक झोंपड़ी पर साइज के अनुसार 2000 से 6000 रुपये तक लागत आती है। कपड़ा और खजूर की चटाई भी लगवाएं तो लागत बढ़ जाता है। यहां कई झोंपड़ियां चार आदमियों के लायक तो कई किसानों ने 10-12 किसानों के रहने के लायक बड़ी झोपड़ियां बनवाई हैं। नांगलोई एरिया के भी कई कारीगर किसानों की झोपड़ियां बनाने आते हैं।
बांस की झोपड़ियां आदि बनाने का काम करने वाले कई कारीगर किसानों के पड़ाव में काम की तलाश में घूमते हैं। नजफगढ़ रोड के निकट बाईपास पर झोपड़ी बनाने आए नरसिंह ने बताया कि वह होटल, कैफे, रेस्टोरेंट और कोठियों में बांस की हट बनाने का काम करते हैं। लेकिन लॉकडाउन की वजह से वो धंधे ठप चल रहे हैं। अब किसान आंदोलन से कुछ राहत मिली है। नर सिंह ने बताया कि वह और उसके परिवार के लोग किसानों की 40 से अधिक झोंपड़ियां बना चुके हैं। लाक डाउन की वजह से हुआ नुकसान यहां पूरा हो रहा है। बठिंडा के आंदोलनकारी किसान सुखविंदर सिंह ने बताया कि पिछले महीने कई बार आई आंधी से उनके टेंट को कई बार नुकसान पहुंचा। लकड़ी के फट्टे गिरने से एक साथी किसान को चोट भी लग गई थी। लेकिन बांस की खरपच्चियों से बनी दीवारें मजबूत तो हैं ही, बहुत हल्की भी हैं। आंधी-तूफान में किसी के ऊपर गिर भी जाए तो कोई नुकसान नहीं हो गया।
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