फोटो 71: बादली में स्थित ईंट भट्टा। संवाद
- फोटो : रेलवे के आरक्षण केंद्र पर तत्काल टिकट के लिए लाइन में खड़े लोग।
बादली (झज्जर)। सीमेंट पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) में छूट मिलने के बाद भी आशियाना बनाना सस्ता नहीं होगा। क्योंकि सीमेंट पर मिली छूट को ईंट की बढ़तीं कीमतों ने निगल लिया है। जीएसटी की संशोधित दरों के अनुसार सीमेंट को 28 प्रतिशत के स्लैब से निकालकर 18 प्रतिशत के स्लैब में डाल दिया है। जबकि ईंट पकाने में प्रयोग होने वाले कोयला पर पहले पांच प्रतिशत जीएसटी लगता था और संशोधित दरों के तहत अब 18 फीसदी जीएसटी लग रहा है।
क्षेत्र में ईंटों के दाम बढ़ गए हैं। इसका कारण ईंट-भट्ठा बंद होने के साथ ही कोयले पर बढ़ाया गया जीएसटी भी है। एकाएक आए उछाल के कारण अब आम आदमी के लिए आशियाना बनाना महंगा हो गया है। निर्माण कार्य करा रहे लोगों को महंगी दरों पर ईंटें खरीदनी पड़ रही हैं।
प्रदूषण कम करने के लिए एनजीटी के निर्देश पर जिग-जैग प्रणाली के ईंट-भट्ठा की चिमनियां पहली मार्च से शुरू होंगी। ऐसे में भट्ठा मालिक को अपने स्टॉक से ही ईंटों के बिक्री करनी है, जिसके चलते प्रति हजार 300 से 600 रुपये बढ़ा दिए हैं। क्षेत्र में 200 से ज्यादा ईंट भट्ठे हैं। सभी जिग जैग से संचालित होने के चलते पहली मार्च तक एनजीटी के आदेशानुसार बंद हैं।
वहीं लंबे समय तक बारिश के चलते कच्ची ईटों की पत्थाई का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है जोकि आमतौर पर दिवाली से पहले शुरू हो जाता था। इस बार जल भराव के चलते मिट्टी के दाम बढ़ाने की संभावना भी बनी है। हर 15 दिनों में ईंट के रेट बढ़ते जा रहे हैं। इस कारण 6 हजार रुपये प्रति हजार मिलने वाली ईंट 6400 से 6600 रुपये तक हो गई है।