-फोटो 55 : शहर में प्रदर्शन करते एसयूसीआई के कार्यकर्ता। स्रोत संगठन
बहादुरगढ़। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने लाइनपार के सुभाष नगर क्षेत्र में अरावली पर्वत को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। जिला कमेटी सदस्य रामकिशन ने कहा कि अरावली के खत्म होने से हरियाणा-राजस्थान में सूखा, तापमान वृद्धि और जैव विविधता का नुकसान तय है।
इसके अलावा बनास, लूणी और साहिबी जैसी नदियां सूखने की कगार पर पहुंच सकती हैं। अरावली पर्वत शृंखला लगभग 800 किलोमीटर लंबी है और प्रति हेक्टेयर करीब 20 लाख लीटर भूजल पुनर्भरण की क्षमता रखती है। यह प्राकृतिक डस्ट बैरियर के रूप में थार मरुस्थल के फैलाव को रोकती है।
उन्होंने चेताया कि खनन और वनों की कटाई बढ़ने से दिल्ली-एनसीआर में पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे प्रदूषक कण बढ़ेंगे जिससे स्मॉग की समस्या गंभीर हो जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त करने की मांग की जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचाई की पहाड़ियों को अरावली पर्वत श्रेणी से बाहर कर उनमें खनन की अनुमति दी है।
वहीं संगठन सदस्य विद्या देवी ने इसे केंद्र की सरकार का जनविरोधी कदम बताते हुए व्यापक जनआंदोलन की अपील की।