फोटो फीचर..फोटो- 64: पीले फूलों से सजे सरसों के खेत। बसंत पंचमी पर बहादुरगढ़ के गांव बालौर के खे
बादली। खेत में सरसों की फसल लहलहाने लगी है। सरसों के फूल देखकर बसंत के आगमन का अहसास होने लगता है। मौसम ने साथ दिया तो सरसों की बंपर पैदावार की संभावना है। करीब 20 दिनों से कड़ाके की ठंड के बाद सरसों की फसल खिल गई है।
बादली पैक्स के अधीन आने वाले 23 गांवों में पिछले वर्ष की अपेक्षा सरसों की फसल का रकबा कम है। जिसका प्रमुख कारण जल भराव रहा है। नवंबर माह में जल भराव के चलते सरसों की बुवाई कम हो सकी लेकिन जहां सरसों की बुवाई हुई है वहां फिलहाल सरसों उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु है।
वर्तमान में किसानों के खेतों में सरसों की फसल लहलहाने लगी है। बीते वर्ष करीब दो हजार एकड़ भूमि पर सरसों की खेती की गई थी जो कि इस वर्ष आधी रह गई है। किसान दीपक और रामकिशन ने बताया कि सरसों की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली खेती है। इसमें दूसरे खेती के तुलना में मेहनत भी कम है।
इस वर्ष अधिक वर्षा होने के कारण से जल स्रोत भरे हैं। किसान आसानी से खेतों में फसलों को पानी पहुंचा पा रहे हैं। पिछले वर्षों में सरसों की खेती में बीमारी की भी शिकायत होती थी लेकिन इस बार कोई बीमारी नहीं आई है। कृषि विशेषज्ञ एवं एसडीओ सुनील कौशिक ने बताया कि सरसों की फसल काफी अच्छी है। किसानों को अब अपने फसलों के कीट से नियंत्रण रखना है। कीट फसलों को नुकसान पहुंचा सकते है। कीट नियंत्रण रखने के बाद फसलों की पैदावार भी बढ़ेगी।