केंद्रीय बजट को जहां सरकार संतुलित और विकासोन्मुखी बता रही है वहीं घरेलू मोर्चे पर महिलाओं की उम्मीदों को यह बजट पूरा नहीं कर पाया। रसोई के बढ़ते खर्च को लेकर महिलाओं में निराशा देखने को मिली।
दैनिक उपयोग की खाद्य वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच बजट में कोई ठोस राहत न मिलने से आम गृहिणियों की चिंता बढ़ गई है। सिलिंडर के दाम भी 1 फरवरी से 50 रुपये बढ़ा दिए गए हैं। इससे उनकी रसोई पर बोझ बढ़ गया है।
दाल, सब्जी, तेल और मसालों के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं। बजट से उम्मीद थी कि रसोई से जुड़ी चीजों पर टैक्स में राहत या सब्सिडी की घोषणा होगी लेकिन कोई राहत नहीं मिली। महंगाई का सीधा असर घर के बजट पर पड़ता है और सबसे ज्यादा बोझ महिलाओं को ही उठाना पड़ता है।
-अंगूरी देवी, गृहिणी
गैस सिलिंडर, दूध और सब्जियों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। बजट में महिलाओं और बच्चों के पोषण को लेकर कोई विशेष योजना सामने नहीं आई जो निराशाजनक है। सरकार अगर खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए तो आम परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
-अलका, नई बस्ती निवासी
वेतन सीमित है लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहा है। बजट में मध्यम वर्ग की महिलाओं के लिए रसोई खर्च को कम करने वाली कोई ठोस नीति नजर नहीं आई। आवश्यक खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी कम किया जाना चाहिए।
-ममता, शिक्षिका
अगर सरकार वास्तव में आम जनता को राहत देना चाहती है तो रसोई के बजट को प्राथमिकता देनी होगी। खाद्य पदार्थों की कीमतों पर नियंत्रण और महिलाओं को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाना समय की मांग है।
-मोना जैन, सेक्टर-6 निवासी
-फोटो 85 : अलका
-फोटो 85 : अलका
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