बादली। पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। तीनों गांवों के सरपंच और पंच पद पहले ही आरक्षित किए जा चुके हैं, जबकि अब मतदाता सूची का प्रकाशन शेष है। लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगे जा रहे हैं। इसके बाद अब तीनों गांवों में चुनाव की सुगबुगाहट तेजी से होने लगी है। संभावित उम्मीदवारों ने लोगोंं के बीच में आना-जाना शुरू कर दिया है। चौक-चौराहों पर चर्चाओं का माहौल गर्म है। संभावना जताई जा रही है कि जून-जुलाई में पंचायत के चुनाव होंगे।
क्षेत्र का सबसे बड़ा गांव बादली है और सबसे छोटा एमपी माजरा है। जबकि पाहसौर ब्राह्मण बाहुल्य गांव हैं। तीनों गांवों में मतदाताओं की संख्या करीब 15 हजार है। लेकिन पंचायती चुनाव नहीं हुए हैं। 2022 के आम चुनाव के दौरान तीनों गांव नगर पालिका (नपा) और पंचायत प्रणाली में उलझे रहे और बाद में नपा तोड़कर पंचायत प्रणाली लागू की गई लेकिन चुनाव नहीं हो सके।
सरपंच पहुंचे हैं विधानसभा
राजनीति के नजरिए से बादली गांव की अपनी पहचान रही है। बादली गांव का सरपंच रहकर राजनीति शुरू करने वाले चौधरी धीरपाल सिंह हरियाणा सरकार में मंत्री बने जबकि लगातार 5 बार विधानसभा चुनाव जीते। इसी तरह से बादली से सरपंच बनने के बाद नरेश शर्मा दो बार विधायक चुने गए। सरपंच रहे रतिराम छनपाड़िया ने भी विधानसभा का चुनाव लड़ा। ऐसे में बादली के लोगों की नजर सरपंच पद पर रहती है।
पंचायती समीकरण:
गांव
कुल वार्ड मतदाता
सरपंच पद
बादली 20 पंच
12 हजार
सामान्य श्रेणी(अदर देन वूमैन)
पाहसोर
08 पंच
1200
एससी महिला
माजरा
03 पंच
550
सामान्य महिला
तैयारियां पूरी
दो साल से पंचायत चुनाव नहीं हुए हैं। अब चुनाव के लिए अधिसूचना का इंतजार है। वार्डबंदी और आरक्षण संबंधी सभी तैयारियां पूरी की जा रही है। फिलहाल मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। अधिसूचना जारी होते ही चुनाव करवाए जाएंगे।
- सतीश यादव, एसडीएम, बादली।