झज्जर। फरवरी में आने वाले केंद्र सरकार के आम बजट से किसान संगठनों को आस जगी है कि इस बार वित्तमंत्री के पिटारे से किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आएगी। किसानों के द्वारा बड़े पैमाने पर देश भर में की जा रही आत्महत्याओं के पीछे बड़ा कारण उसका कर्ज में डूबा हुआ होना है। इसके चलते किसान संगठन इस बार उम्मीद लगाए बैठे हैं कि देश भर के किसानों पर सहकार समितियों और राष्ट्रीयकृत बैंकों में खड़े 153 हजार करोड़ रुपये के कर्ज पर सरकार कोई बड़ा फैसला लेेगी, जिनसे उनका कुछ भला होगा। अब देखना यह है कि बजट में वित्तमंत्री अपने पिटारे से किसानों पर कितना खजाना लुटाते हैं। बजट को लेकर अमर उजाला ने किसान प्रतिनिधियों और किसानों से बातचीत की तो उनकी प्रतिक्रियाएं कुछ इस प्रकार से रही।
खाद-बीज सबसिडी को बढ़ाया जाए-यादव
अखिल भारतीय किसान सभा के उपप्रधान रामचंद्र यादव ने कहा कि सरकार को बजट में खाद-बीज पर सबसिडी बढ़ानी चाहिए। खाद की सबसिडी में जो कटौती पिछले कुछ समय में की है, उसे वापस लेना चाहिए। यादव ने कहा कि सरकार अगर वाकई किसानों का भला करना चाहती है कि तो किसान की जरूरत का पूरा सामान सरकारी खाद-बीज केंद्र पर ही मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान निजी खाद-बीज केंद्रों पर लूटने का मजबूर है।
मनरेगा में बढ़ाए जाएं वर्किंग डे-दलाल
किसान सभा के कोषाध्यक्ष महासिंह दलाल ने कहा कि आर्थिक मंदी के दौर में भी अर्थव्यवस्था को संभालने में मनरेगा स्कीम का बड़ा योगदान देश के अर्थशास्त्रियों के द्वारा माना गया है। अत: बजट में प्रावधान होना चाहिए कि मनरेगा के 100 दिन काम को बढ़ाकर 200 दिन किया जाए। वहीं वर्तमान में मिल रहे प्रतिदिन 268 रुपये को बढ़ाकर कम से कम 500 रुपये किए जाएं क्योंकि पूरे प्रदेश मेें डेलीवेज मजदूरी इतनी कम नहीं है।
ट्यूबवैल कनेक्शन में मिले राहत-मनीष
दुजाना गांव निवासी किसान मनीष नंबरदार ने बताया कि किसानों को बिजली कनेक्शन के समय बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं किसान को बिजली का नया कनेक्शन लेते समय करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की राशि निगम में जमा करवानी होती है, जो कि किसानों के लिए एक बड़ी रकम है। ऐसे में किसानों को इसमें रियायत देनी चाहिए।
आयात टैक्स को बढ़ाया जाए-विपिन
पेलपा निवासी युवा किसान विपिन का कहना है कि सरकार के द्वारा इन दिनों फसलों का आयात शुल्क बिलकुल घटा दिया गया है, जो कि देशभर के किसानों के लिए बड़ा घातक कदम है। सरकार को आयात शुल्क बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान फसल बीमा का लाभ भी किसानों को नहीं मिल पा रहा, सरकार को चाहिए यह योजना सरकार निजी एजेंसियों की बजाए खुद चलाए।