सोनीपत। जिला नागरिक अस्पताल में 3 नवंबर से चर्म रोगियों काे उपचार नहीं मिल सकेगा। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. राघवेंद्र सिंह तबादला पानीपत जिला के समालखा स्थित उपमंडल नागरिक अस्पताल में हो गया है। 31 अक्तूबर तक वह जिला अस्पताल में अपनी सेवाएं देंगे। उसके बाद उपचार न मिलने पर चर्म रोगियों की परेशानी बढ़ सकती है।
जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना दाद व खुजली के मरीज पहुंचते हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद चर्म रोगियों की संख्या में इजाफा होने लगा हे। अस्पताल में चर्म रोग की ओपीडी 250 से ज्यादा होती है। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. राघवेंद्र सिंह इसी साल मार्च में पानीपत से स्थानांतरण होकर आए थे और सोनीपत के जिला अस्पताल में ओपीडी में जांच कर रहे हैं।
इससे पहले चर्म रोग विशेषज्ञ डाॅ. राजेश सिंघल को सरकार ने जुलाई 2024 में एसएमओ पदोन्नत किया था। उनकी नियुक्ति सीएचसी जुआं में कर रखी है। उसके बाद से वह जिला नागरिक अस्पताल में सप्ताह में तीन दिन ओपीडी लगा रहे थे। डॉ. राजेश सिंघल से पहले चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. राघवेंद्र इसी अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वह फरवरी 2019 में स्थानांतरण होकर पानीपत चले गए थे।
प्रदूषण की वजह से बढ़ रहे चर्म रोगी
प्रदूषण की वजह से अस्पताल में भी एलर्जी और चर्म रोग से पीड़ितों की संख्या बढ़ने लगी है। शहर में ऐसी कोई सड़क नहीं है, जहां धूल और धुएं का गुबार नहीं उठता हो। चिकित्सक का मानना है कि एलर्जी और अस्थमा के रोगियों की तादाद में वृद्धि का कारण शहर में बढ़ रहा वायु प्रदूषण भी है। ऐसे में बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करना भी बेहद जरूरी है। पूरी बाजू तक कपड़े पहनना जरूरी है। वातावरण में धूल और धुएं के साथ ही सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से भी चर्म और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बचने के लिए जितना हो सके शरीर के हिस्से को ढककर रखा जाना चाहिए। लोग धूल से एलर्जी का शिकार भी हो रहे हैं। लोगों को धूल से बचने के लिए मुंह पर कपड़ा बांधकर चलना चाहिए।