फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शौर्य गाथा : 11 गोली लगने के बाद भी तत्कालीन कर्नल करतार का हौसला कम नहीं हुआ

Sat, 10 May 2025 02:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
विज्ञापन
-फोटो 60 : राजेंद्र सिंह दलाल
विज्ञापन
बहादुरगढ़। 11 गोली लगने के बाद भी तत्कालीन कर्नल करतार सिंह दलाल राज रेजिमेंट का हौसला कम नहीं हुआ था। वह पाकिस्तान आर्मी के साथ लगातार लड़ते रहे। शरीर के जिस भी हिस्से में गोली लगी, वहां पट्टी बांधकर लगातार युद्ध के मैदान में डटे रहे। जवानों ने उन्हें वहां से जाने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि मैं पीछे हट जाऊंगा तो मेरी बटालियन का क्या होगा। उन्होंने जवानों को आगे बढ़ने को कहा और जीत हासिल की।
विज्ञापन

यह बातें पाकिस्तान से हुए 1971 के युद्ध की यादें ताजा करते हुए सेवानिवृत कैप्टन राजेंद्र सिंह दलाल ने सांझा की। उन्होंने बताया कि एक बार फिर भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकाने नष्ट करने के लिए हमला किया है। वर्ष 1971 के युद्ध में बहादुरगढ़ के गांव मांडोठी का विशेष योगदान रहा। इसमें गांव के 76 जवानों ने अपनी बहादुरी दिखाई थी। गांव से न केवल सिपाही बल्कि कर्नल तक युद्ध में लड़े थे।
सेवानिवृत कैप्टन राजेंद्र सिंह दलाल ने बताया कि इस समय देश में युद्ध का माहौल है। पूर्व सैनिकों को जहां भी मदद के लिए बुलाया जाएगा, वे जरूर जाएंगे। तत्कालीन कर्नल करतार सिंह दलाल के बारे में बताया कि एक जगह थी जहां पर कमांडर पहुंचे थे। उनके जाने के बाद उन्होंने अपना दिमाग लगाया और सैकेंड बटालियन को एक तरफ कर दिया। इसी दौरान बाई तरफ से हमला हो गया।
विज्ञापन

पहले से वहां तैनात बटालियन पर भी पाकिस्तान की ओर से हमला हो गया। जब हमला हुआ तो तत्कालीन कर्नल करतार सिंह ने देखा कि बटालियन पर हमला हो रहा है तो नुकसान हो जाएगा। इस पर उन्होंने तुरंत हमला करने आदेश दिया और भारत की ओर से भी हमला किया गया। मांडोठी के 76 जवानों में से एक जवान इस युद्ध में शहीद हो गया। पूरी बटालियन में 35 जवान शहीद हुए थे। तत्कालीन कर्नल करतार सिंह दलाल बहुत बहादुर थे। कोरोना के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें