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Jhajjar-Bahadurgarh News: किताब से लेकर रजिस्टर और डायरी तक बेच रहे स्कूल, कीमत चार से पांच हजार

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26jjrp17- हैप्पी मेहरा
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महंगी किताब-काॅपियों से अभिभावक पर बढ़ रहा बोझ, विभाग बन रहा अनजान
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झज्जर। निजी स्कूलों में दाखिले का दौर शुरू हो चुका है। इसके साथ ही उनकी मनमानी भी शुरू हो गई है। कई निजी स्कूल संचालकों ने किताब से लेकर स्टेशनरी तक के लिए दुकानें फिक्स कर दी है। इसके अलावा अन्य दूसरी दुकानों पर संबंधित स्कूल की किताबें ही नहीं मिल पाती। इसे लेकर संवाद न्यूज एजेंसी की तरफ से पड़ताल की गई तो हैरान करने वाले मामले सामने आए।
शहर की तीन अलग-अलग दुकानों पर जाकर जब निजी स्कूलों की किताबें के सैट की जानकारी ली गई तो वह चार से हजार रुपये के दिए जा रहे थे। एक दुकान पर पहली कक्षा का किताबों, रजिस्टर का सेट चार हजार रुपये में दिया जा रहा था जबकि दूसरी दुकान पर पहली कक्षा का निजी किताबों व स्टेशनरी का सैट 4500 रुपये में था। इसके अलावा तीसरी दुकान पर यह सैट 4700 रुपये का था।
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10 प्रतिशत तक देते हैं छूट
निजी किताब बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि वह किताबों पर केवल 10 प्रतिशत की ही छूट देते हैं। इससे ज्यादा वह नहीं दे पाते। कुछ ही किताब में 15 प्रतिशत तक छूट दी जाती है।

ये है किताबों, रजिस्टर व डायरी का मूल्य.
कक्षा पहली के लिए 3900 से 4300 रुपये, कक्षा दूसरी के लिए 3960 से 4500 रुपये, कक्षा तीसरी के लिए 5800 से 6 हजार रुपये, कक्षा चौथी के लिए 5900 से 6200 रुपये और कक्षा पांचवीं के लिए 6 हजार से 6500 रुपये वसूले जा रहे हैं।

स्कूल ने जो दुकान बताई, वहीं से किताबें लेनी पड़ती है। इसके अलावा कई बार स्कूल से भी दी जाती है। अब तो स्टेशनरी का सामान भी स्कूल से मिलता है। ड्रेस भी स्कूल से लेनी पड़ती है। अब नया ट्रेंड चला है कि पूरे साल की फीस भरें। मध्यम वर्ग एक साथ इतनी फीस कैसे भर सकता है।
हैप्पी महरा, अभिभावक

स्कूल की तय दुकान से ही किताबें खरीदनी पड़ती हैं, जिससे खर्च काफी बढ़ जाता है। महंगी किताबों और स्टेशनरी के कारण बजट बिगड़ गया है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए मजबूरी में खरीदना पड़ता है।
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नरेंद्र कुमार, गांव गुढ़ा

वर्जन
शिक्षा विभाग की हिदायतों के अनुसार ही निजी स्कूलों को काम करना होगा। यदि कोई दुकान फिक्स करता है या खुद सामान बेचता है तो उस पर विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी बीईओ की ड्यूटी चेकिंग के लिए लगा दी गई है। वह खंड स्तर पर निजी स्कूलों में जाकर जांच करेंगे।
रतिंदर सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी

26jjrp17- हैप्पी मेहरा

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