केंद्र सरकार हिमाचल में ऑटोमेटिड एसएमएस योजना शुरू करने जा रही है।
सरकार स्कूलों में पहली से 8वीं कक्षा तक के बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील को पौष्टिक बनाने की तैयारी कर रही है। अब इस भोजन में सुगंधित दूध भी मिलेगा।
स्कूली बच्चों को दोपहर के भोजन में 2000 मिली लीटर मीठा व सुगंधित दूध दिया जाएगा। इसके लिए जरूरी तैयारी तेजी से की जा रही है। मौलिक शिक्षा विभाग शीघ्र ही बर्तन खरीदेगा। राज्य के मौलिक शिक्षा निदेशक की ओर से मिड-डे मील अधीक्षक ने सभी जिलों के मौलिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में एक पत्र लिखा गया है। पत्र के जरिये बर्तनों की जरूरत के बारे में पूछा गया है। यह पूछा गया है कि उनके जिले में किस साइज के कितने पतीलों और बच्चों को दूध देने के लिए कितने गिलासों की जरूरत है। निदेशक आफिस को सभी जिलों ने अपनी आवश्कता से अवगत करा दिया है। यह विवरण भी भेज दिया गया है कि किस स्कूल को कितने गिलास और कितने पतीले चाहिए। निदेशक आफिस ने यह जानकारी तत्काल मांगी। ताकि बर्तन खरीदने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा सके।
दरअसल, स्कूलों में बच्चों को दूध मिलने की उम्मीद स्वराज अभियान के प्रयासों की बदौलत हुई है। इस संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका (857/2015) दायर करके केंद्र सरकार व अन्य संबंधित एजेंसियों से बच्चों को गर्मी की छुट्टियों में भी पौष्टिक मिड-डे मील देने की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने इसी याचिका पर निर्णय लेते हुए मिड-डे मील में 200 मिली लीटर दूध उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। भारत विकास परिषद के सचिव सतीश शर्मा ने कहा कि दूध बच्चों का हक है, उन्हें जरूर मिलना चाहिए। इससे बच्चों में रक्त की कमी को दूर करने में भी मदद मिलेगी। बीईओ मदन चोपड़ा ने कहा कि बर्तनों की जरूरत से अवगत करा दिया गया है। निदेशालय से जरूरी संसाधन व निर्देश मिलते ही यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।