दो दिन पड़े कोहरे ने यहां चार जनों को लील लिया, रोडवेज की बसों समेत दर्जनों वाहन भी टकराए। गनीमत रही कि सुबह के समय चलने वाले स्कूली वाहन हादसे का शिकार नहीं बने।
नौनिहाल सर्दी व घने कोहरे के बीच इसी प्रकार सुरक्षित रहें, इसको लेकर बृहस्पतिवार को प्रशासन ने निजी स्कूल संचालकों व शिक्षा अधिकारियों से मंथन किया।
कुछ आवश्यक दिशा निर्देश भी आरटीए की ओर से दिए गए, लेकिन स्कूल बसों को लेकर स्कूलों की विभिन्न खामियों पर यहां चर्चा तक नहीं हुई।
परिवहन प्राधिकरण सचिव (आरटीए) प्रदीप कौशिक ने बैठक में स्कूल संचालकों को निर्देश दिए कि सभी स्कूल वाहनों में कोहरे के चलते फोग लाईट के साथ-साथ पार्किंग लाईट की सही ढंग से व्यवस्था सुनिश्चित हो ताकि स्कूल वाहन का सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके।
जिले के सभी स्कूल वाहनों में माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सीसीटीवी व जीपीआरएस का रिकॉर्ड दुरुस्त रखा जाए और हर माह के पहले सप्ताह में दोनों उपकरणों का डाटा रिकार्ड प्राधिकरण कार्यालय में जमा कराना सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पीड गवर्नर की भी उपलब्धता सभी स्कूल वाहनों में होने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्कूल वाहनों में महिला सहायक की भी नियुक्ति होनी चाहिए।
इस मौके पर सहायक सचिव धर्मेंद्र सहित जिले के निजी स्कूल संचालक उपस्थित रहे। स्कूल संचालकों ने इन व्यवस्थाओं पर तुरंत अमल की हामी भर ली।
इन हालातों से कैसे निपटें
जिले में अभी दर्जन भर स्कूल ऐसे हैं जो खुद तो वाहन नहीं रखते, लेकिन इन्होंने अनुबंध के आधार पर वाहन रख रखे हैं। इन वाहनों से प्रतिमाह अच्छी खासी रकम स्कूल प्रबंधतंत्र को बतौर कमीशन मिलता रहता है।
वाहन चालक भी कमाने की होड़ में रहते हैं। ऐसे स्कूल के मालिक बच्चों की जिंदगी से खेल रहे हैं। इनके वाहनों में ठूंसकर बच्चे भरे जाते हैं। यही नहीं, तमाम वाहन नियमों को दरकिनार कर रसोई गैस सिलेंडरों से भी चलते हैं।
बात मारुति वैन की करें तो इसमें तय सात की सीट के सापेक्ष बच्चों की संख्या कम से कम 18 रहती है। जितने बच्चे बढ़ेंगे उतषनी इनकी आमदनी भी।
ऐसे में कमाना प्रथम उद्देश्य है। इस होड़ में मासूम जिंदगियों को ताक पर रखा जाता है। सुबह के समय ये वाहन शहर के हर चौक चौराहे और ग्रामीण क्षेत्र में दिख जाते हैं।
इनमें न कोई नाम पट्टिका और न ही कोई संकेत। सिर्फ ठूंसकर भरे गए बच्चे ही शीशे के पीछे से देखते मिल जाएंगे।
सर्दी से पहले दुरुस्त व्यवस्था
कुछ ऐसे भी स्कूल हैं जिन्होंने सर्दी से पहले व्यवस्था को दुरुस्त कर लिया है। इन्होंने स्कूली बच्चों के वाहनों में फॉगलाइट के साथ ही विभिन्न इंतजाम तय समय से पहले ही पूरे कर लिए हैं।
एक स्कूल के वाहन में ठंड के मौसम में गर्म हवाएं मिलती हैं। लाइट के लिए विशेष इंतजाम हैं। इसी प्रकार अन्य कई स्कूलों में वाहनों के वाइपर भी दुरुस्त करा लिए गए हैं। लेकिन ये प्रबंध कुछ गिने चुने प्रमुख स्कूलों की बसों में ही हैं।
ये हैं स्कूली वाहनों के मानक
- फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए
- खिड़कियों पर जालियां लगी हों
- स्कूल का स्टाफ बस में हो
- स्कूल कार्यालय और प्रिंसिपल के नंबर लिखे होने चाहिए
- बस के गेट पर बच्चों की लिस्ट जरूर लिखी हो
- फायर इंस्टिंग्यूशर लगा होना चाहिए
- बच्चों के उतरने और चढ़ने के लिए सीढ़ी लगी हो
- फिटनेस और परमिट आवश्यक
- चालक और परिचालक का चरित्र प्रमाण पत्र जरूरी
-कोहरे से निपटने के लिए आवश्यक प्रबंध।
ये सावधानी जरूरी
- वाहन का ब्रेक व टायरों में हवा और लाइटें ठीक रखें
- नशा करके वाहन न चलाएं
-वाहन सीमित गति से चलाएं और निर्धारित लेन में रहें
-प्रदूषण की नियमित जांच कराएं
-विद्यालय के निकट धीमी गति पर वाहन रखें
-बिना लाइट के गाड़ी न चलाएं
-वाहन चलाते समय सीट बेल्ट बांधे रखें
-मोड़ पर हॉर्न अवश्य बजाएं
-रात में डिपर का प्रयोग लगातार करें
-वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात न करें
-ज्वलनशील पदार्थो को वाहन में न लेकर जाएं
-फुटबोर्ड पर लटकाकर बच्चों को न लेकर जाएं।
स्कूल बसों की नियमित चेकिंग की जाती है। नियमों का पालन न करने वालों पर कार्रवाई भी की जाती है। नियमों का पालन जरूरी है। स्कूल संचालक भी नियमों के बारे में बस ड्राइवरों से लगातार बात करते रहें। सर्दी व कोहरे से बचाने के लिए सकूल संचालकों को बसों में आवश्यक प्रबंध करने की हिदायतें जारी कर दी हैं। जो इन पर खरा नहीं उतरेगा, उनकी बसें इंपाउंड की जा सकती हैं।
-प्रदीप कौशिक, आरटीए