सेक्टर-6 के बाल गृह के स्टाफ में आपसी खींचतान के चलते यहां से सप्ताहभर में आठ बच्चे फरार हो चुके हैं। इन घटनाओं से प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए हैं।
लेकिन अभी तक यहां की व्यवस्था सुधारने के लिए सार्थक कदम उठते नजर नहीं आ रहे। बाल कल्याण विभाग के अधिकारी व्यवस्था सुधारने के बजाय मामले की लीपापोती करने में लगे हैं।
वीरवार को झज्जर के एसडीएम पंकज सेतिया व जिला बाल कल्याण अधिकारी अनार सिंह व पुलिस अधिकारी बाल गृह में जांच के लिए पहुंचे।
अधिाकरियों ने स्टाफ और बच्चों से व्यवस्थाओं व अन्य पहलुओं पर जानकारी जुटाई। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने भी इस मामले में जांच शुरू कर दी। जो बच्चे फरार हुए थे उनसे भी बातचीत करते हुए आवश्यक रिपोर्ट तैयार की है।
एक साथ पांच बच्चों के फिर से फरार होने के मामले में यहां की अधीक्षक सरोज पर गाज गिरी। अधिकारियों ने उन्हें यहां से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
बताया गया है कि जब से नया स्टाफ लगाया गया है तभी से यहां की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगा है। पुराने व नए स्टाफ के बीच खींचतान से यहां रहने वाले बच्चे भी परेशान रहने लगे।
इसी कारण सप्ताहभर में दो बार बच्चों के फरार होने की घटना हो चुकी है। प्रशासनिक अधिकारी कुछ भी यह बताने से परहेज करते दिखे कि आखिरकार यहां से बच्चों के फरार होने के पीछे क्या कारण है।
मगर यहां के स्टाफ के बीच कुछ समय से बढ़ी खींचतान को लेकर वे कड़ी कार्रवाई करने के लिए मन बना चुके हैं। सप्ताहभर में आठ बच्चों के लापता होने से साफ प्रतीत होता है कि यहां सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है।
बाल संरक्षण आयोग ने भी इन दोनों घटनाओं पर कड़ा संज्ञान लेते हुए यहां की रिपोर्ट तलब की है।
पुलिस का पहरा
बाल गृह से बच्चों के फरार होने के बाद से ही प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। फिर ऐसा न हो, इसको ध्यान रखते हुए यहां पुलिस का पहरा बढ़ाया गया है।
बाल गृह में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यहां तक कि मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी। बाल कल्याण विभाग के अधिकारी कुछ भी कहने से बचते रहे और यहां की नाकामियों को छुपाने में लगे रहे।
पेड़ों की काटी टहनियां
पेड़ों पर चढ़ते हुए दीवार फांदकर बच्चों के फरार होने की बात सामने आते ही बाल कल्याण विभाग के अधिकारियों ने यहां के पेड़ों की टहनियों को कटवा दिया, जो दीवारों के साथ सटी हुईं थीं।
यही नहीं यहां पर अब 24 घंटे निगरानी बढ़ा दी। साथ में कुछ फुट ऊंची दीवारों को ऊंचा करने व उन पर और कंटीली तारें बांधने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
पूरे कैंपस में नहीं लगे सीसीटीवी
बच्चों की सुरक्षा को लेकर यहां पर केवल नाम की ही खानापूर्ति की जा रही है। जहां से बुधवार को एक साथ पांच बच्चे लापता हुए हैं वहां काफी बड़ा क्षेत्र खाली पड़ा है।
यहां पर किसी भी तरह से कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए हैं। इसी का फायदा उठाकर बच्चे यहां से दीवार फांदकर फरार हुए थे।
लड़के होंगे शिफ्ट
बाल गृह में फिलहाल 30 बच्चे रह रहे हैं। इनमें से 23 लड़कियां तो 7 लड़के शामिल हैं। इनकी देखरेख के लिए यहां पर दस कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई हुई है।
फिर भी यहां व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही। ऐसे में यहां से जो लड़के हैं उन्हें रेवाड़ी शिफ्ट किया जाएगा। ऐसे में चार लड़के जो यहां से फरार हुए वे इसी से नाराज होकर भागने की जुगत में थे।
अधीक्षक को किया बाहर
कई साल से बाल गृह में सेवा कर रही यहां की अधीक्षक सरोज को बुधवार रात से ही अधिकारियों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया।
उसने अधिकारियों की इस कार्रवाई पर सवाल उठाया कि आखिर नए स्टाफ को अंदर रखा गया है तो उसे ही बाहर क्यों किया गया। वह बार-बार इस मामले में निष्पक्ष जांच व न्याय की गुहार लगाती दिखी।
मामले की जांच शुरू
बच्चों के फरार होने के पीछे क्या वजह रही है, इसकी जांच की जा रही है। कई पहलुओं को खंगाला गया है। साथ में यह भी पता लगाया जा रहा है कि यहां स्टाफ के बीच किस तरह से आपसी खींचतान बनी हुई है। इसमें जो दोषी होगा कार्रवाई होगी।
पंकज सेतिया, एसडीएम झज्जर