सरपंच सीएम, मंत्री, सांसद और विधायक के हर कार्यक्रम का विरोध करेंगे। एसोसिएशन के पदाधिकारी 10 अप्रैल के दिल्ली धरने की रणनीति तैयार करने झज्जर पहुंचे थे। रणधीर सिंह समैण ने कहा कि पंचायती राज एक्ट पूर्ण रूप से लागू नहीं होने तक सत्ताधारी नेताओं का विरोध रहेगा।
ई-टेंडरिंग प्रणाली को लेकर सरकार के खिलाफ लंबे समय से मोर्चा खोल रही हरियाणा की सरपंच एसोसिएशन ने सत्ताधारी भाजपा-जजपा नेताओं के खिलाफ एक और बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत सरपंच एसोसिएशन ने सत्ताधारी नेताओं का विरोध करने के लिए प्रदेश भर के गांवों के बाहर उनके नताओं के बहिष्कार के बोर्ड लगाने की बात कही है।
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हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के पदाधिकारी शनिवार को झज्जर में जिले के सात ब्लॉकों की सरपंच एसोसिएशन के ब्लॉक पदाधिकारियों की बैठक लेने के लिए आए थे। यहां उन्होंने ब्लॉक प्रधानों के साथ 10 अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन की रणनीति तैयार करने के लिए आए थे।
यहां बैठक के बाद पत्रकारों के रूबरू हुए सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणधीर सैमण ने कहा कि पूर्व में उनकी एसोसिएशन की इसराना में हुई बैठक में सरकार के खिलाफ कई कड़े फैसले लिए गए थे। इन फैसलों मेें प्रदेश के हर गांव में सत्ताधारी नेताओं के विरोध के साइन बोर्ड लगाए जाने का भी फैसला था।
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इस फैसले के अलावा हरियाणा के सीएम, मंत्री, सांसद और सत्ताधारी दलों के विधायकों के हर कार्यक्रम में पहुंच कर विरोध किए जाने का भी फैसला लिया गया है। यह तब तक जारी रहेगा जब तक की सरकार हरियाणा में पंचायती राज एक्ट को पूर्णतया लागू नहीं कर देती। रणबीर सिंह गिल ने सरकार पर पंचायती राज एक्ट को हरियाणा में पूरी तरह से खत्म किए जाने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया।
एसोसिएशन से जुड़े एक अन्य पदाधिकारी चुन्नी लाल शर्मा ने कहा कि पंचायती राज एक्ट को लेकर सरकार की मंशा ठीक नहीं है। हरियाणा में पंचायत चुनाव से पहले दो साल तक प्रदेश के किसी भी गांव में धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। इस दौरान बलवान सिंह, जिला प्रधान सोनू ढ़ाकला, पवन भदाना, बलवान सुरेहती, प्रदीप कलोई, जगमाल सिंह, रामनारायण के अलावा अन्य सरपंच मौजूद रहे।