एक तरफ तो प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने का ढिंडोरा पीट रही और दूसरी तरफ अधिकारी सरकार की इस भ्रष्टाचार विरोधी नीति को चूना लगाने से बाज नहीं आ रहे। इसका खुलासा गांव छारा निवासी राकेश दलाल द्वारा लगाई गई आरटीआई के माध्यम से हुआ है, जिसमें पाया गया कि जिले भर में बगैर सीएलयू सैकड़ों बड़े शिक्षण संस्थान, कंपनियां आदि चल रहे हैं, लेकिन विभाग द्वारा नोटिस जारी करने पर भी इन पर कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। इस सारे मामले पर कार्रवाई को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा सीएम विंडो पर भी शिकायत दी गई है, जिसमें इस प्रकार के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर भी ठोस कदम उठाने के बारे में कहा गया है।
212 नोटिस हो चुके जारी
जनवरी 2013 से 18 अप्रैल 2016 तक आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार जिले भर में करीब 117 अवैध निर्माण पाए गए, जिनमें मुख्य रूप से बड़े शिक्षण संस्थान, निजी कंपनियां, अन्य काम-धंधों के लिए तैयार की गईं इमारतें हैं। ऐसा नहीं कि इस बारे में संबधित विभाग को जानकारी नहीं है। इस संबंध में विभाग 2013 से 2016 के बीच इनके खिलाफ 212 के करीब नोटिस भी जारी कर चुका है, लेकिन इन पर कार्रवाई करने की संबंधित विभाग द्वारा जहमत नहीं उठाई जा रही। आखिर बगैर सीएलयू के चल रहे इन प्रोजेक्टों को विभाग द्वारा क्यों नहीं हटवाया जा रहा।
मात्र तीन सीएलयू के लिए आवेदन
आरटीआई से विभाग ने यह भी जानकारी दी है कि इस अवधि के दौरान समय-समय पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने करीब 410 अवैध निर्माण, 5364 डीपीसी, 39 बाउंडरी वॉल तोड़ने का कार्य किया, लेकिन मामला अब 117 अवैध निर्माणों पर आकर अटक रहा है। इनको नोटिस जारी हुए भी काफी समय हो चुका है, लेकिन कार्रवाई नहीं की जा रही। इस अवधि के दौरान नोटिस जारी होने के बाद तीन सीएलयू के बारे में तो आवेदन किया गया था, लेकिन 114 अवैध प्रोजेक्ट अब भी धड़ल्ले से काम कर रहे हैं।
नोटिस जारी भी, फिर भी विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई गांव छारा निवासी राकेश दलाल ने बताया कि उन्होंने जिलेभर में बगैर सीएलयू के चल रहे बड़े गौरख धंधों के खिलाफ आरटीआई से जानकारी प्राप्त की। आरटीआई से यह भी पता चला कि जिले भर में सैकड़ों ऐसे शिक्षण संस्थान, कंपनियां आदि हैं, जो बगैर सीएलयू धड़ल्ले से चल रहे हैं। विभाग को इसकी जानकारी भी है और इनके खिलाफ नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई करने की जहमत विभाग द्वारा नहीं की जा रही है।
एक आरटीआई के दो जवाब
आरटीआई कार्यकर्ता राकेश ने संबधित विभाग से एक अवधि के दौरान अवैध निर्माणों को हटवाने पर आने वाले खर्च का ब्योरा मांगा तो पहली रिपोर्ट में जिला योजनाकार विभाग ने 9 लाख 56 हजार 758 रुपये खर्च के रूप में जानकारी दी, लेकिन दूसरी आरटीआई में यह राशि घटकर 4 लाख 83 हजार 960 रुपये बताई गई। एक ही आरटीआई के मिले दो जवाबों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पहली आरटीआई में अवैध निर्माणों को हटवाने के लिए खर्च की गई राशि मात्र कुछ ही दिनों में मांगी गई दूसरी आरटीआई में घटकर इतनी कम कैसे हो गई।
एनओसी के मामले में हो चुकी अधिकारी की गिरफ्तारी
कुछ ही दिनों पहले जमीन की एनओसी देने के मामले में भी एक अधिकारी की चार लाख रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तारी की जा चुकी है। बता दें कि राजस्थान की किसी निजी कंपनी द्वारा झज्जर क्षेत्र में कुछ जमीन खरीदी गई थी, लेकिन इस जमीन की एनओसी देने की एवज में विभाग के अधिकारी द्वारा मांगी गई चार लाख रुपये की रिश्वत की शिकायत पर विजिलेंस टीम द्वारा संबंधित अधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया जा चुका है।
अभी कुछ ही महीने पहले मेरा झज्जर में स्थानांतरण हुआ है। इस प्रकार के अवैध निर्माणों को लेकर लगातार कार्रवाई जारी है। उक्त मामला अभी अभी मेरे संज्ञान में आया है, जिस पर गहनता से जांच करके जल्द उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
देशराज, जिला योजना कार विभाग अधिकारी