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Jhajjar-Bahadurgarh News: आपातकाल को याद कर आज भी कांप जाती है रूह

Wed, 25 Jun 2025 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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24jjrp03- धर्मवीर
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झज्जर। आपातकाल को काला अध्याय भी कहा जाता है। उस समय झज्जर जिला रोहतक के अधीन होता है। जिले के कई लोगों को आपातकाल के दौरान जेलों में डाल दिया गया था। आज भी वह लोग उस समय को याद करते हैं तो पूरी दास्तान आंखों के सामने घूम जाती है। जिले के कोका गांव निवासी एडवोकेट निर्मल सिंह, दिल्ली गेट निवासी धर्मवीर ने आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रम को सांझा किया।
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32 साल की उम्र में 7 माह जेल में रहे धर्मवीर
दिल्ली गेट खातियों वाली गली निवासी 82 वर्षीय धर्मवीर ने भी आपातकाल के समय सात माह तक जेल काटी। उस समय धर्मवीर की उम्र 32 साल की थी। धर्मवीर बताते हैं कि वह उस समय आर्य सभा में थे। आर्य सभा राजनीतिक दल था, जो आगे बढ़ रहा था और राज धर्म अखबार चलाता था। यह अखबार सरकार की गलत नीतियों के बारे में लिखता था।
आपातकाल के समय उनको रोहतक से पकड़ा गया। उस समय झज्जर रोहतक के अधीन आता था। वह 7 माह तक रोहतक जेल में रहे। उस समय जेल में डालकर खूब पीटा जाता था। हर किसी के चेहरे पर भय का साया था। किसी को नहीं पता था कि कब तक जेल में रहेंगे। जहां जेल में रखा जाता था, उसको चार-चार ताले लगाए जाते थे। पंडित श्री राम शर्मा को भी रोहतक में उनके घर से चारपाई सहित उठाकर जेल में डाल दिया गया था। वह मंजर आज भी याद करके रूह कांप जाती है। सरकार ने अब आपातकाल सहने वालों की सुध ली है।
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छात्र लीडर निर्मल चौहान को कॉलेज से घर आते समय पकड़ा, तीन जेलों में रहे
कोका गांव निवासी एडवोकेट निर्मल चौहान छात्र जीवन से आरएसएस से जुडे़ थे। एडवोकेट निर्मल चौहान ने बताया कि वह रेवाड़ी कॉलेज में पढ़ते थे। इसी दौरान उन्होंने आरएसएस ज्वाइन कर ली थी और छात्र नेता बन गए थे। 1975 में आपातकाल के दौरान सभी को पकड़ा जा रहा था। उनके परिवार ने भी उनको हैलीमंडी स्थित कॉलेज में दाखिला लेने के लिए कहा था, लेकिन वह रेवाड़ी ही पढ़ना चाहते थे।
एक दिन वह कॉलेज से घर आ रहे थे तो कुलाना चौक के पास चारों तरफ से पुलिस ने उनको घेर लिया। उनको पकड़कर रेवाड़ी थाने ले जाया गया। वहां उनको दो दिन तक रखा गया। उस समय के तत्कालीन एसएचओ की पत्नी जब उनको खाना देनी आई तो उनको देख लिया और कारण पूछा। उसने सब कुछ बता दिया। उस समय एसएचओ की पत्नी ने अपने पति से कहा कि इस बच्चे को हाथ नहीं लगाना।
यदि ऐसा किया तो तुम्हारे बच्चे कभी नहीं होंगे। एसएचओ की पत्नी ही दो दिन तक उनके लिए खाना लाई। उसके बाद उनको नारनौल फिर महेंद्रगढ़ जेल में शिफ्ट किया गया। एसएचओ की पत्नी की वजह से उनके साथ कोई मारपीट नहीं हुई, क्योंकि पुलिस को आदेश थे कि जो भी पकड़ में आए, उनको खूब पीटा जाए। वह लगभग 6 माह तक जेलों में रहे।

आपातकाल में 19 माह 20 दिन जेल में रहे थे पूर्व विधायक
पूर्व विधायक उदय सिंह दलाल का लंबा राजनीतिक कॅरिअर रहा। वे 1953 में पुलिस में भर्ती हुए और सिरसा की चौटाला पुलिस चौकी के प्रभारी रहे। बाद में 1963 में वे किसान नेता चरण सिंह के संपर्क में आए। गांव मांडौठी के सरपंच चुने गए। उसके बाद ब्लॉक समिति और फिर जिला परिषद के मेंबर बने। जेपी आंदोलन से जुड़े और इमरजेंसी के दौरान 19 महीने 20 दिन तक मिसा एक्ट के तहत जेल में रहे।

24jjrp03- धर्मवीर

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