क्षेत्र के गांव दुल्हेड़ा के पास एक मिल्क प्लांट पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा। टीम में शामिल अधिकारियों ने दूध के सैंपल लिये और प्लांट में काम करने वाले श्रमिकों से बातचीत की। टीम के साथ भारी संख्या में पुलिस रही। विभाग की कार्रवाई देर शाम शुरू हुई और रात तक जारी थी।
गांव दुल्हेड़ा से खेड़का की ओर जाने वाले रास्ते में एक पुराना मिल्क प्लांट है जो कि कई साल से क्षेत्र में दूध सप्लाई करता है। प्लांट के अपने दूध के कई टैंकर हैं।
इन्हीं टैंकरों से दूध सप्लाई किया जाता है। इस प्लांट में देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस के साथ पहुंचकर छापामार कार्रवाई की। दूध के सैंपल भरे। हालांकि इस दौरान आवश्यक कार्रवाई को गुप्त रखा गया है और सैंपल को जांच के लिए भेजे जाने की बात कही गई है। पूरी कार्रवाई प्लांट का अंदर से ताला लगाकर की गई और किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया। अंदर टीम ने प्लांट में लगी मशीनों की जांच की और कुछ सामग्री के सैंपल भी लिए।
छापामार टीम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ. राजकरण व अन्य स्वास्थ्यकर्मी और झज्जर के डीएसपी राजीव कुमार शामिल रहे।
बाद में डीएसपी राजीव कुमार ने बताया कि अभी जांच की जा रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी। जिस पर प्लांट पर छापा मारा गया है वह मिल्क प्लांट खेड़का रोड पर स्थित है।
प्लांट के बाहर नहीं लिखा नाम :
खेड़का रोड स्थित जिस मिल्क प्लांट में छापा मारा गया है उसके मेन गेट पर कोई नाम नहीं लिखा गया है। हालांकि मेन गेट पर दूध सप्लाई करने वाले कई टैंकर खड़े हैं मगर किसी भी टैंकर पर कोई नाम नहीं लिखा गया है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों को ज्यादा संदेह हुआ।
45 से 48 रुपसे केजी बिकता है दूध
आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि प्लांट का दूध 45 से 48 रुपये प्रति किलो मिलता है। अधिकतर ग्रामीण यहां से दूध खरीदते हैं और शहरों में भी सप्लाई किया जाता है।
हालांकि ग्रामीणों ने इस बात से अनभिज्ञता जताई कि यह दूध कहां से आता है और कैसे बनाया जाता है। दूध पर कोई नाम नहीं लिखा होता है बल्कि खुला लीटर में ही बेचा जाता है।