नौनिहालों को पोलियो रोधी खुराक देने के साथ स्वास्थ्य विभाग ने
मर्ज भी दे दिया। सिविल अस्पताल में मंगलवार को बच्चों को पोलियो की दवा
पिलाने के बाद घटिया क्वालिटी की टॉफी थमाई जा रही थी।
मामला स्वास्थ्य
अधिकारियों के संज्ञान में आया तो आनन-फानन में ही टॉफी वापस मंगाई गई और
कर्मियों को हिदायत दी गई कि दोबारा ऐसा न करें। टॉफी की खटास इतनी थी कि
वह बच्चों को तो दूर बड़ों के खाने के लायक भी नहीं थी। खास बात ये है कि
टॉफी एक चिकित्सक की ओर से मंगाई गई थी।
स्वास्थ्य विभाग कठघरे में
सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग पल्स पोलियो अभियान को लेकर कठघरे में आ
गया। नौनिहालों को पोलियो रोधी दवा पिलाने के साथ यहां उनको प्रसन्न करने
के लिए टॉफी देने की व्यवस्था भी की गई थी। टॉफी अस्पताल के सीनियर डॉक्टर
की ओर से मंगाई गई थी।
ये टॉफी बच्चों के स्वास्थ्य के हिसाब से ठीक हैं या
नहीं इसको देखे बिना ही कर्मचारी ये टॉफी बच्चों को थमाने में जुट गए।
मामला एसएमओ के पास गया तो वे हरकत में आ गए। उन्होंने आनन-फानन में टॉफी
मंगवाई और खा के देखी। असल में ये टॉफी इतनी खट्टी थी कि छोटे बच्चों के
लिए खाना संभव नहीं था। इन पर तुरंत रोक लगा दी गई। स्वास्थ्य कर्मियों को
थमाई गई टॉफियां भी वापस मंगा ली गईं। कर्मियों ने पूछताछ में बताया कि
वरिष्ठ चिकित्सक ने ये टॉफी उनको दी थी।
बालिका ने काटा रिबन
तीन दिवसीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत मंगलवार को स्वास्थ्य अधिकारियों
ने एक बालिका के हाथ से रिबन कटा कर की।
इसके बाद कार्यकारी सिविल सर्जन
डॉ. ईश्वर सिंह ने नौनिहालों को दवा की दो बूंद पिलाई। अभियान को लेकर
स्वास्थ्य विभाग की 570 टीमें, 65 मोबाइल टीमें व 30 ट्रांजिट टीमों ने
विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाया। विभाग ने 1,34,771 बच्चों को दवा
पिलाने का लक्ष्य तय किया है।
सायं तक 60 प्रतिशत बच्चों को दवा पिलाई गई।
20 व 21 जनवरी को सभी टीमें जिले के घरों में घर-घर जाकर बच्चों को दवाई
पिलाएंगी। इस मौके पर उप सिविल सर्जन डॉ. राकेश कुमार, डॉ. राजेश सैनी, डॉ.
विनीत यादव, डॉ. एन.के. गर्ग चिकित्सा अधीक्षक व डॉ. कुलदीप अर्बन नोडल
अधिकारी उपस्थित रहे।
पालियो को दवा पिलाने के बाद बच्चों को टॉफी देने की जानकारी मिली थी। टॉफी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई थी। वो एक चिकित्सक ने अपनी
ओर से दी थी। टॉफी की क्वालिटी अच्छी नहीं थी, इस वजह से इन पर रोक लगा दी
गई। कर्मियों को हिदायत दी गई है कि आगे से ऐसा न करें। टॉफी दें तो अच्छी
क्वालिटी की जिनका स्वास्थ्य पर बुरा असर न हो। -डॉ. मुरारी, एसएमओ।