सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन का न्यायालय द्वारा बढ़ा मुआवजा और रायल्टी सालों से न मिलने से नाराज गांव कसार के किसानों ने मंगलवार को एचएसआईआईडीसी आफिस को ताला जड़ दिया। नाराज किसान पहले आफिस के बाहर इकट्ठा होता देख सभी अधिकारी व कर्मचारी आफिस से बाहर आ गए थे।
दरअसल राज्य सरकार के हरियाणा राज्य औद्योगिक संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने बहादुरगढ़ में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए वर्ष-2008 में गांव कसार, सांखोल व जाखोदा के किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन अधिग्रहीत की थी। उस यह जमीन करीब 23 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर पर अधिग्रहीत की गई थी। इस मुआवजे को किसानों ने मार्केट रेट के मुकाबले बहुत कम बताया और हाईकोर्ट में याचिका लगाकर सरकार को मुआवजा राशि बढ़ाकर देने के आदेश देने की गुहार लगा थी। लेकिन हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट से पहले सीधी सुनवाई करना उचित नहीं समझा और किसानों को जिला न्यायालय जाने को कहा था। जिस पर किसानों ने जिला न्यायालय में अपील की। अब जिला न्यायालय ने वर्ष 2016 में किसानों को एक करोड़, दो लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने के आदेश दिए।
बाहर आ गए अधिकारी
सत्र न्यायालय झज्जर ने सरकार को यह भी कहा कि बढ़ी हुई दर के अनुसार किसानों की मुआवजा राशि का बकाया पैसा 27 जुलाई तक अदा किया जाए। इस फैसले के बाद किसानों ने एचएसआईआईडीसी अधिकारियों से मिलकर कई बार बातचीत की। लेकिन 27 जुलाई तक मुआवजा मिलने की कोई भी संभावना नजर नहीं आई तो मंगलवार को कसार के किसानों ने हर हाल में 27 जुलाई तक मुआवजा देने की मांग को लेकर एचएसआईआईडीसी के आफिस पर ताला लगा दिया। इससे पहले नाराज किसान निगम आफिस में इकट्ठे होने लगे तो आफिस के अंदर मौजूद अधिकारी व कर्मचारी बाहर आ गए।
किसान बोले, कौड़ियों के भाव ली जमीन
प्रदर्शन करने वाले किसानों में गांव के सरपंच टोनी भी शामिल थे। जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई है उनमें बलवंत, रामभगत, चेतराम, मनेकराम, सतीश, सतीश कुमार, रामकिशन, संदीप, बेगन, बबली, प्यारेलाल, चेतराम व कृष्ण समेत 61 खेवटों में शामिल 650 किसान हैं। एचएसआईआईडीसी आफिस पर ताला लगाने की सूचना मिलने पर बहादुरगढ़ से पुलिस मौके पर पहुंची और एचएसआईआईडीसी अधिकारियों व किसानों के बीच बातचीत कराई। किसानों ने कहा कि गांव सांखोल व जाखोदा के किसानों का बकाया दिया जा चुका है। इतना ही नहीं, दो साल की रायल्टी पिछली सरकार के कार्यकाल की और एक साल की रायल्टी वर्तमान सरकार के कार्यकाल की बाकी है।
हमने गांव कसार के किसानों के पूरे पक्ष को समझ लिया है। अब एक-दो दिन बाद हम चंडीगढ़ जाएंगेे और सारी बात वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रख दी जाएगी।
राजीव कुमार, सीनियर मैनेजर, एचएसआईआईडीसी