प्रदेश में ‘पानीपत’ फिल्म का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इसके विरोध में छिल्लर-छिकारा खाप भी उतर आई है। खाप से जुड़े पदाधिकारियों व सदस्यों ने इस बारे में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है और साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार को पत्र लिखकर इस फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है।
छिल्लर खाप के अध्यक्ष बस्तीराम व छिकारा खाप के अध्यक्ष गुलाब सिंह नंबरदार की ओर से प्रतिनिधियों ने खाप के लोगों के साथ एकजुट होकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि पानीपत फिल्म पानीपत की तीसरी लड़ाई पर आधारित है। 1761 में तीसरी लड़ाई अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली व मराठों के बीच हुई थी। इसमें महाराजा सूरजमल की जो भूमिका दिखाई गई है वह सरासर गलत है। इसको लेकर पूरे प्रदेश में फिल्म का विरोध हो रहा है। फिल्म में महाराजा सूरजमल को मराठा पेशावर सदाशिव राव से संवाद के दौरान इमाद को दिल्ली का वजीर बनाने व आगरा का किला सौंपे जाने की मांग करते दिखाया गया है। इस पर मराठा पेशावर सदाशिव राव आपत्ति जताता है और अब्दाली के खिलाफ युद्ध में साथ देने से महाराजा सूरजमल भी इनकार कर देते हैं। महान जाट राजा सूरजमल को जिस तरह से दर्शाया गया है वह पूरी तरह से गलत है। 1761 में मराठों के आधे से अधिक सैनिक मारे जाने के बाद राजा सूरजमल ने उनकी काफी मदद की थी। मराठा सैनिकों के पास खाने के लिए राशन भी खत्म हो चुका था तो उस समय महाराज सूरजमल ने करीब 40 हजार सैनिकों को भरतपुर में शरण दी थी। इस पर उस दौरान करीब 20 लाख खर्चा आया था। पानीपत फिल्म में एक समुदाय को गौरवान्वित करने व दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास किया गया है। इसको लेकर खाप पूरी तरह से विरोध कर रही है।
खाप प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस फिल्म के प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए। ज्ञापन देने वालों में बिजेंद्र नंबरदार कानौंदा, बलवान सिंह निजामपुर, खैरपुर से प्रधान अर्जुन, बामनौली से दीपक प्रधान, कृष्ण, बराही से अजीत सिंह, लडरावन से पूर्व प्रधान रामकिशन, बलजीत आर्य, रामकंवार, ईश्वर मेहरा, रणबीर सिंह, महाबीर सिंह, रामकुमार, बिजेंद्र सिंह निजामपुर, सतबीर, नफे सिंह, ओमवीर, रवि, राजेंद्र सिंह, दयाकिशन, करतार सिंह, हरपाल, शमशेर सिंह, दीपक, प्रकाश, बलजीत, रमेश, संजय कुमार, नीरज समेत कई खाप से जुड़े कई अन्य लोग भी मौजूद रहे।