बहादुरगढ़। सुबह और रात को स्मॉग की चादर फैल रही है। आंखों में जलन और सांस के रोगियों को परेशानी हो रही है। सामान्यत: एयर क्वालिटी इंडेक्स 0 से 50 के बीच ही होना चाहिए, लेकिन यह तीन सप्ताह से 300 के पार चल रहा है। इसके कारण नागरिक अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में बीमार बच्चे पहुंच रहे हैं।
नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अहिभूषण ने बताया कि बच्चों पर प्रदूषण का असर व्यस्कों से ज्यादा होता है, क्योंकि 8 साल की उम्र तक बच्चे के फेफड़े का विकास हो रहा होता है। फेफड़े के अलावा बच्चों के दिल पर भी प्रदूषण का असर पड़ता है। अस्पताल की ओपीडी में आने वाले बच्चों में हर दिन 6 से 8 बच्चे इस तरह की समस्या से पीड़ित आ रहे हैं।
क्या है स्मॉग
नागरिक अस्पताल के एसएमओ डॉ. विनय देशवाल ने बताया कि स्मॉग, अंग्रेजी के दो शब्दों स्मॉक और फॉग से मिलकर बना है। आमतौर पर जब ठंडी हवा किसी भीड़-भाड़ वाली जगह पर पहुंचती है तब स्मॉग बनता है। स्मॉग में पानी की बूंदों के साथ धूल और हवा में मौजूद जहरीले तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और आर्गेनिक कंपाउंड मिलकर नीचे की तरफ ओजोन की गहरी परत बना लेते हैं। सर्दियों में भारी यातायात, उच्च तापमान आदि के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और हवा की गति कम होती है। यह धुआं और धुंध को एक जगह स्थिर होकर स्मॉग बनाती है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अहिभूषण बोले, ये करें उपाय
- घर के अंदर वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
- घर में अगरबत्ती, धूपबत्ती, कोयला वगैरह न जलाएं।
- घर के अंदर या बच्चों के पास धूम्रपान न करें।
- घर में पेंट, सॉल्वेंट्स या वार्निश का इस्तेमाल न करें। जिनसे धुआं निकलता हो।
- बच्चों को सिखाएं कि बाहर जाने के बाद हाथ और चेहरा अच्छी तरह से धोएं।
- बच्चों को संतुलित आहार खिलाएं, जिसमें विटामिन सी और विटामिन ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट भरपूर हों।
- अपने बच्चे की बाल रोग विशेषज्ञ से नियमित जांच करवाएं।
- जब तक प्रदूषण का स्तर नीचे नहीं आता, तब तक खुले में कम से कम निकलें और पानी पीते रहें।
बच्चों में ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर के पास जाएं
- लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत, नाक, गले और आंख में दर्द, आंखों में जलने और उनका लाल होना, बार-बार छींक आना, लगातार नाक में पानी आना।