विकास से महरूम डेढ़ दशक पहले से बसी कॉलोनी छोटूराम नगर की हालत बारिश ने और बिगाड़ दी है। यहां के हजारों लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। बारिश के पानी कि निकासी के बंदोबस्त न होने से कॉलोनी के हालात बद से बदतर हो गए हैं। जगह-जगह गंदगी और पानी भरा है। वार्ड-9, 10 और 11 में बंटा छोटूराम नगर दिल्ली से सटे आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (एमआइई) से सटा हुआ है। कॉलोनी के अधिकतर लोग उत्तर प्रदेश, बिहार व मध्य प्रदेश मूल के निवासी हैं। कम आय वर्ग वाले (श्रमिक) ये लोग पिछले करीब 16 वर्षाें से कॉलोनी में छोटे-छोटे मकान बना कर रहे रहे हैं। अगर ये कहें कि औद्योगिक नगरी इनके कंधों पर है तो गलत नहीं। एमआईई की तमाम फैक्टरियां इनके सहारे ही चल रही हैं। मगर इस श्रमिक कॉलोनी में मूलभूत सुविधाएं शून्य के बराबर हैं। विकास कार्य और सुविधाएं तो दूर यहां जो हालात बने हैं, उनको सुधारने में भी कोई दिलचस्पी नहीं लेता। ये लोग फिलहाल नारकीय जीवन जी रहे हैं। हालात कुछ ऐसे हैं कि कोई भी जन प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी व शहरी की दूसरी कालोनियों के लोग यहां एक दिन भी नहीं गुजार सकते।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन को कोसा
कॉलोनी में निकासी के बंदोबस्त न होने के कारण आम दिनों में भी जगह-जगह गंदा पानी जमा रहता है। जलभराव के कारण लोगों को आने-जाने में बहुत परेशानी होती है। एक निवासी ने बताया कि बारिश वाले दिन बहुत से लोग तो रात को ही फैक्टरी में रुक गए। अमर उजाला की टीम जब कॉलोनी में पहुंची तो लोगों ने अपनी कॉलोनी की बदहाली का दु:खड़ा रोया। प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को भी जमकर कोसा। लोगों ने कहा कि वोट लेने के लिए तो सभी कालोनी में आ जाते हैं, मगर काम कोई नहीं कराता।
निकासी के बंदोबस्त नहीं
कॉलोनी की निवासी प्रवीण ने बताया कि निकासी के बंदोबस्त नहीं है। बारिश में हालात बिगड़ जाते हैं। शनिवार को बरसात हुई तो उनके मकान के भीतर तक पानी घुस गया। इस कारण बेहद परेशानी हुई। बार-बार पानी बाहर निकालना पड़ा। बच्चे भी घर में कैद होकर रह गए। प्रशासन इस ओर ध्यान दे और कॉलोनी में निकासी के बंदोबस्त कराए, ताकि यहां के हजारों लोगों को राहत मिल सके।
एक-एक पल खतरे में
बीना देवी ने कहा कि उनके घर के बाहर कई 100 गज क्षेत्र में गड्ढा बना हुआ है। आठ फुट से अधिक गहरे इस गड्ढे ने दलदल का रूप ले रखा है। यहां के लोगों का एक-एक पल भी खतरे में गुजरता है। इसमें गिरने का डर बना रहता है। कुछ दिन पहले एक बच्ची भी इस में गिर गई थी। गनीमत रही थी कि उस पर किसी की नजर पड़ी और उसे सकुशल निकाल लिया गया, वरना हादसा बड़ा हो सकता था।
बीमारियां फैल रहीं
नीकिता ने कहा कि कॉलोनी का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं जहां हालात सामान्य हो। हर जगह गंदगी और जलभराव है। यही कारण है कि यहां के बच्चे अक्सर बीमार रहते हैं। इस मौसम में मलेरिया और डेंगू आदि फैलने का खतरा बना रहता है, मगर इनसे बचाव के लिए कॉलोनी में कोई प्रबंध नहीं। गलियां कच्ची हैं, इसलिए जलभराव की स्थिति से निबटने के लिए खुद के खर्चे पर मिट्टी डलवानी पड़ती है।
हो रहा है भेदभाव
आनंद सोनी ने कहा कि कॉलोनी को बसे डेढ़ दशक से अधिक हो गया। इसके बाद की तमाम कॉलोनियां विकसित हो गई, मगर उनकी कॉलोनी के साथ भेदभाव हो रहा है। मार्च-2014 में कालोनी को विकास कार्यों के लिए भी झंडी दिखा दी गई, मगर काम नहीं हो रहे। प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दें और यहां विकास कार्य कराए, ताकि यहां के लोगों को भी महसूस हो कि वे शहर में रह रहे हैं।
ये भी हैं समस्याएं
पेयजल लाइन नहीं
सीवरेज लाइन नहीं
कोई डिस्पेंसरी नहीं
सरकारी स्कूल नहीं
गलियां पक्की नहीं
निकासी के पुख्ता बंदोबस्त नहीं
सफाई व्यवस्था भी नहीं