फोटो 69: बहादुरगढ़ के रेलवे रोड पर महाशिवरात्रि को लेकर लाइटिंग से सजा शिव मंदिर। संवाद
- फोटो : udhampur
बहादुरगढ़। महाशिवरात्रि पर बुधवार को मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसको लेकर भी खास इंतजाम किए गए हैं। शिवरात्रि पर भगवान शिव को चढ़ाए जाने वाले बेबेर, बेलपत्र, धतूरा और फूलों की दुकानें सज गई हैं। बेर की कीमत भी 60 से 80 रुपये प्रति किलो रही।
मंदिरों के पुजारियों के अनुसार, भक्त महाशिवरात्रि पर सुबह 4 बजे से ही जलाभिषेक के लिए आने लगते हैं। सुबह 5 बजे से दोपहर तक सबसे अधिक भीड़ रहती है। शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी सीयाराम ने बताया कि भोले बाबा कैलाश पर्वत पर रहते हैं और पहाड़ों में अक्सर फलाहार के रूप में कंदमूल फलों का सेवन किया जाता है। इसलिए भोले बाबा को कंदमूल चढ़ाए जाते हैं।
कैसे करें पूजा
शंकरजी की प्रसन्नता के लिए साधक प्रतिदिन आधी रात को (11 से 2 बजे के बीच) ईशानकोण (उत्तर पूर्व) की तरफ मुख करके ऊं नम: शिवाय: मंत्र की 120 माला जप करें। यदि गंगाजी का तट हो तो अपने चरण उनके बहते हुए जल में डालकर जप करना अधिक उत्तम है। इस तरह छह महीने करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं।
27 को मनाई जाएगी अमावस्या
27 फरवरी को अमावस्तया मनाई जाएगी। अमावस्या वाले दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में और समान अंशों पर स्थित होते हैं। इसके अतिरिक्त अमावस्या वाले दिन चंद्रमा का उजला वाला भाग सूर्य की ओर होता है, जिस कारण पृथ्वी पर इसकी रोशनी नहीं आती। अमावस्या को शास्त्रों में दान, तर्पण और पवित्र नदियों में स्नान के लिए विशेष रूप से फलदायी बताया गया है। कहा जाता है कि इस दिन दान देकर पितर और देवता प्रसन्न होते हैं।